रवि शास्त्री: क्रिकेट की पिच से कमेंट्री बॉक्स तक, हर भूमिका में रहे असरदार

रवि शास्त्री: क्रिकेट की पिच से कमेंट्री बॉक्स तक, हर भूमिका में रहे असरदार

नई दिल्ली, 26 मई (आईएएनएस)। भारतीय क्रिकेट में रवि शास्त्री एक ऐसा नाम हैं जिन्होंने जब जिस भूमिका को निभाया, उसमें बड़ी सफलता हासिल की। 1983 में अपना पहला वनडे विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहे शास्त्री ने भारतीय क्रिकेट में एक ऑलराउंडर, एक कोच और एक कमेंटेटर के तौर पर बड़ी सफलता हासिल की है।

27 मई 1962 को मुंबई में जन्मे रवि शास्त्री एक बल्लेबाजी ऑलराउंडर थे। मुंबई के लिए घरेलू क्रिकेट खेलने वाले शास्त्री ने भारतीय टीम के लिए 1981 में डेब्यू किया था और दिसंबर 1992 में अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच खेला था। दाएं हाथ से बल्लेबाजी और बाएं हाथ से स्पिन गेंदबाजी करने वाले शास्त्री ने भारत के लिए 80 टेस्ट और 150 वनडे खेले।

टेस्ट मैचों में 11 शतक और 12 अर्धशतक लगाते हुए 3,830 रन बनाए और 151 विकेट लिए। इसके अलावा, वनडे में 4 शतक और 18 अर्धशतक लगाते हुए 3,108 रन और 129 विकेट उनके नाम हैं। अपने समय के बेहतरीन ऑलराउंडर रहे शास्त्री ने घरेलू क्रिकेट में मुंबई के लिए खेलते हुए 10 जनवरी 1985 को वानखेड़े स्टेडियम में बड़ौदा के खिलाफ रणजी ट्रॉफी मैच के दौरान छह गेंदों पर छह छक्के मारे थे। शास्त्री टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया में दोहरा शतक लगाने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज थे।

1992 में क्रिकेट से संन्यास के बाद शास्त्री ने माइक संभाला। दमदार, जोशीले और निर्भिक आवाज के दम पर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अंग्रेजी भाषा में भारत की सशक्त आवाज बनकर उभरे। उनका नाम अंग्रेजी भाषा के महंगे कमेंटेटरों में लिया जाता है। 2011 वनडे विश्व कप के फाइनल में धोनी के विजयी छक्के के साथ भारत की जीत के समय बोला गया 'धोनी फिनिशेस इन स्टाइल' आज भी करोड़ों भारतीयों के कानों में गूंजता है।

शास्त्री का कोचिंग क्षेत्र में आने का कोई इरादा नहीं था, लेकिन किस्मत शायद उनसे यह काम भी कराना चाहती थी। शास्त्री 2014 से 2016 तक भारतीय टीम के डायरेक्टर के पद पर रहे। 2017 से 2021 तक उन्होंने भारतीय टीम के कोच के रूप में कार्य किया। टी20 विश्व कप 2021 की समाप्ति के साथ उनका कोचिंग कार्यकाल समाप्त हुआ।

शास्त्री ने 43 टेस्ट मैचों में भारतीय टीम की कोचिंग की। भारत 25 मैच जीता, जबकि 13 में हार मिली। शास्त्री की कोचिंग में भारतीय टीम 76 वनडे मैचों में 51 जीती और 22 हारी, जबकि 65 टी20 में 45 जीत और 18 हार मिली। इस दौरान शास्त्री के कार्यकाल में विदेशों में भारत की टेस्ट जीत का रिकॉर्ड किसी भी दूसरे कोच से श्रेष्ठ था। विदेश में खेले गए 28 टेस्ट मैचों में भारतीय टीम ने 13 जीते और 12 गंवाए।

शास्त्री की कोचिंग में भारतीय टीम ने देश-विदेश में हर फॉर्मेट में अपना दबदबा बनाया। टेस्ट में भारतीय टीम दुनिया की श्रेष्ठ टीमों में से एक बनी। टेस्ट सीरीज में भारतीय टीम ने श्रीलंका, वेस्टइंडीज, ऑस्ट्रेलिया (दो बार) को उसके घर में हराया। इंग्लैंड के खिलाफ 2-1 से आगे रहे। पहले वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के टेबल में टॉप पर रही। शास्त्री के नाम बतौर कोच बेशक, कोई आईसीसी खिताब नहीं है, लेकिन भारतीय टीम जिस निडरता के साथ उनके कार्यकाल में खेली और विदेशों में सफलता हासिल की थी, उसने उन्हें बड़ी प्रतिष्ठा दिलाई।

भारतीय टीम के कोच पद से हटने के बाद वह फिर से कमेंट्री बॉक्स में लौट चुके हैं और पूर्व की भांति ही, बेखौफ होकर निष्पक्षता के साथ क्रिकेट की सशक्त आवाज के रूप में अपनी पहचान बनाए हुए हैं।

--आईएएनएस

पीएके