नई दिल्ली, 16 जनवरी (आईएएनएस)। मकर संक्रांति के बाद देशभर में बसंत पंचमी की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। बसंत पंचमी का त्योहार 23 जनवरी को देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग तरीकों से मनाया जाएगा।
बसंत पंचमी को विद्या की देवी मां सरस्वती और फाल्गुन के महीने के आगमन के तौर पर मनाया जाता है, लेकिन देश के अलग-अलग राज्यों में बसंत पंचमी को मनाने का तरीका भी अलग है।
पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम में भव्य तरीके से बसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी मां सरस्वती का पूजन किया जाता है। घर से लेकर शिक्षण संस्थानों और सामुदायिक पंडालों में मां की प्रतिमाओं को स्थापित कर पूजन होता है और रात भर भक्ति गीत गाए जाते हैं।
बंगाल में बसंत पंचमी के दिन 'हाते खोड़ी' भी होता है। इस दिन माता-पिता बच्चों को पहला अक्षर लिखना सिखाते हैं। माना जाता है कि बसंत पंचमी के दिन 'हाते खोड़ी' करने से बच्चे पर मां सरस्वती की विशेष कृपा होती है।
पंजाब और हरियाणा में बसंत पंचमी को पीली सरसों के लहलहाते खेतों से जोड़कर देखा जाता है। बसंत पंचमी सरसों की फसल के पकने का संकेत देता है। इस दिन पंजाब और हरियाणा में पीले वस्त्र पहनकर पारंपरिक भोजन का स्वाद लिया जाता है। इसके साथ ही पतंग भी उड़ाई जाती है।
उत्तर प्रदेश के वाराणसी और प्रयागराज के घाटों पर विशेष गंगा आरती का आयोजन होता है और स्नान का भी विशेष महत्व माना गया है। बसंत पंचमी के दिन प्रयागराज के त्रिवेणी संगम में स्नान करना फलदायी माना जाता है। कहा जाता है कि पवित्र नदी में स्नान से सारे पापों का नाश होता है और घर में समृद्धि का वास होता है।
राजस्थान और गुजरात में बसंत पंचमी के दिन पतंगबाजी के बड़े आयोजन किए जाते हैं। इस दिन लोग पीले कपड़ों से लेकर पीले फूलों की माला भी धारण करते हैं। राजस्थान और गुजरात में बसंत पंचमी को नए ऊर्जावान मौसम के रूप में देखा जाता है।
वहीं, तेलंगाना के बासर में मां सरस्वती का विश्व प्रसिद्ध मंदिर है, जहां बसंत पंचमी के दिन 'अक्षर अभ्यासम' का आयोजन होता है। इसमें बच्चों को शिक्षित करने के प्रयास से लिखना और पढ़ना सिखाया जाता है और विद्या से जुड़ी चीजों का दान भी किया जाता है।
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