प्री-बजट: बैंक यूनियन और मध्यम वर्ग की महिलाओं की मांगें, आयकर छूट बढ़ाने पर जोर

प्री-बजट: बैंक यूनियन और मध्यम वर्ग की महिलाओं की मांगें, आयकर छूट बढ़ाने पर जोर

रांची, 21 जनवरी (आईएएनएस)। आम बजट 2026-27 आने में दो हफ्ते से भी कम का समय बचा है। ऐसे में आगामी केंद्रीय बजट को लेकर विभिन्न वर्गों की अपेक्षाएं सामने आने लगी हैं। इसी क्रम में इंडियन बैंक एम्प्लॉई यूनियन, झारखंड के जनरल सेक्रेटरी शशिकांत भारती और कामकाजी मध्यम वर्ग की महिलाओं की ओर से अनुपम त्रिपाठी ने प्री-बजट पर प्रतिक्रियाएं दीं और सरकार के सामने कई अहम मांगें रखीं।

शशिकांत भारती ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि पूरे देश को यह भली-भांति मालूम है कि सरकारी बैंक देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। आज सरकारी बैंकों की मजबूती के कारण ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गर्व के साथ यह कह पाते हैं कि भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया में तीसरे स्थान की ओर अग्रसर है। उन्होंने सरकार से मांग की कि सरकारी बैंकों को और अधिक सशक्त किया जाए, उनकी शाखाओं की संख्या बढ़ाई जाए, और निजी बैंकों को भी सरकारी बैंकों में तब्दील किया जाए।

शशिकांत भारती ने कहा कि वर्तमान में बैंकों में लगभग 2 से 3 लाख बैकलॉग वैकेंसी पड़ी हुई हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस बजट में इन पदों पर नियुक्तियों की घोषणा की जाए। उनका कहना था कि आज देश युवाओं के कंधों पर आगे बढ़ रहा है। अगर इन लाखों रिक्त पदों को भरा जाता है तो इससे न केवल रोजगार बढ़ेगा, बल्कि देश की आर्थिक स्थिति और मजबूत होगी। इसके साथ ही उन्होंने बैंकों पर बढ़ते एनपीए (नॉन परफॉर्मिंग एसेट) के मुद्दे को उठाते हुए मांग की कि बिग लैंडर या मिडिल लैंडर को क्रिमिनल लॉ के दायरे में लाया जाए ताकि बैंकिंग व्यवस्था पर एनपीए का बोझ कम हो सके।

उन्होंने आयकर को लेकर सुझाव देते हुए कहा कि आईटी स्लैब में छूट की सीमा को 12 लाख से बढ़ाकर 20 लाख किया जाना चाहिए। इसके अलावा, शिक्षा ऋण और हाउसिंग लोन को पूरी तरह से माफ करने या उन्हें ब्याज मुक्त किए जाने की भी मांग रखी।

वहीं, वर्किंग और मिडिल क्लास वुमेन अनुपम त्रिपाठी ने बजट को लेकर अपनी अपेक्षाएं साझा कीं। उन्होंने समाचार एजेंसी आईएएनएस से कहा कि पिछले साल सरकार ने आयकर में 12 लाख रुपए तक की छूट दी थी, लेकिन मौजूदा महंगाई और बढ़ते खर्चों को देखते हुए इस सीमा को बढ़ाकर कम से कम 15 लाख रुपए किया जाना चाहिए। उन्होंने निवेश के मुद्दे पर चिंता जताते हुए कहा कि बैंक जमा पर ब्याज दरें काफी कम हैं, जिसके कारण लोग म्यूचुअल फंड और अन्य बाजार आधारित निवेश की ओर जा रहे हैं, लेकिन बाजार में उतार-चढ़ाव के चलते वहां भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऐसे में सरकार को निवेशकों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।

अनुपम त्रिपाठी ने सोने और चांदी की लगातार बढ़ती कीमतों पर भी चिंता जताई और कहा कि भले ही यह अंतरराष्ट्रीय बाजार पर निर्भर करता हो, लेकिन सरकार को इस पर नियंत्रण और रेगुलेशन के लिए प्रयास करने चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस बजट में महिलाओं के लिए शिक्षा ऋण को ब्याज मुक्त किया जाए, ताकि ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसे अभियानों को और मजबूती मिल सके। इसके अलावा उन्होंने जमीन और संपत्ति की रजिस्ट्री से जुड़े खर्चों को भी महिलाओं के लिए सरल और सस्ता बनाने की मांग की।

--आईएएनएस

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