गंगटोक, 26 अप्रैल (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' कार्यक्रम में गंगटोक में 'लगस्टल स्टूडियो' की उद्यमी और संस्थापक चिमिब ओंगमु भूटिया की तारीफ की। इस पर चिमिब ओंगमु भूटिया ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि मैं अब भी निशब्द हूं। मेरे रोंगटे खड़े हो गए। ‘मन की बात’ कार्यक्रम में हमारा नाम लेने के लिए मैं हमारे प्रधानमंत्री की आभारी हूं। यह हमारे लिए और कई अन्य उद्यमियों के लिए एक बहुत बड़ा अवसर है। यह हमें और बेहतर काम करने के लिए प्रोत्साहित करता है।
चिमिब ओंगमु भूटिया ने कहा कि जब आप बांस की बात करते हैं तो विशेष रूप से पूर्वोत्तर भारत में बांस का बहुत बड़ा भंडार मौजूद है। अब तक जो स्थिति रही है, उसे बदलकर हमें इसे आय के स्रोत में तब्दील करना होगा। इसके लिए हमें एक उचित योजना की आवश्यकता है। यह उचित योजना रिसर्च और मैनपावर के संदर्भ में होनी चाहिए।
चिमिब ओंगमु भूटिया ने कहा कि हमें इन सभी चीजों की जरूरत है। यह मेरी एक छोटी सी पहल है। मेरे जैसे और भी कई उद्यमी बांस के क्षेत्र में इसी तरह का काम कर रहे हैं, इसलिए मुझे उम्मीद है कि इस प्रयास के बाद हमें फंडिंग और शोधकर्ताओं तक पहुंचने के मामले में और अधिक पहचान मिलेगी। अब तक उस स्तर तक पहुंचना एक बड़ी चुनौती रही है।
उन्होंने कहा कि जैसा कि आप जानते हैं, फंडिंग प्राप्त करना हमारे लिए एक बड़ी चुनौती है। प्रधानमंत्री ने 'मन की बात' में भी इस क्षेत्र को बढ़ावा देने की बात कही है, इसलिए मुझे पूरी उम्मीद है, बल्कि मैं 101 प्रतिशत निश्चिंत हूं कि बांस के क्षेत्र में हमें आगे चलकर बहुत बड़े अवसर प्राप्त होंगे।
उन्होंने कहा कि 'आत्मनिर्भर भारत' प्रधानमंत्री का एक सपना है। इसमें एक खास उत्पाद है बांस। अगर हम इस तरह की नीतियों पर और ज्यादा ध्यान दें, जो पहले से ही मौजूद हैं तो हम बांस के क्षेत्र में बहुत कुछ बड़ा और बेहतर कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि मैं हमेशा इस बात के लिए आभारी रहूंगी कि उन्होंने बांस के पुनर्निर्माण और सुधार से जुड़ी यह नीति लागू की। आज मैं जिस मुकाम पर हूं, वह इसी नीति की वजह से है। यह एक ऐसी पहल है जिसकी मैं सच में बहुत सराहना करती हूं और सिर्फ मैं ही नहीं, बल्कि और भी बहुत से लोग। पूर्वोत्तर के बहुत से लोग, जितना मैं जानती हूं, लगभग 2-3 हजार लोग इस नीति से लाभान्वित हुए हैं। मैं इस नीति के लिए प्रधानमंत्री का हमेशा आभारी रहूंगी। मुझे विशेष रूप से यह बात बहुत अच्छी लगती है कि उन्होंने हमारे पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए इतना बेहतरीन काम किया है।
उन्होंने कहा कि मैंने आपको पहले ही बताया था कि 2017 में बांस से जुड़े हर तरह के निर्माण और पुनर्निर्माण के लिए केंद्र सरकार की ओर से (पुनर्गठित राष्ट्रीय बांस मिशन) नीतियां लाई गई थीं। इनसे बहुत से लोगों को मदद मिली है। मैंने भी बांस से जुड़ा एक हस्तशिल्प का काम शुरू किया, और उस नीति की वजह से मुझे बहुत मदद मिली। आज मैं जिस मुकाम पर हूं, उसमें उस नीति का बहुत बड़ा योगदान है। मैं इसके लिए हमेशा आभारी रहूंगी।
उन्होंने कहा कि बांस के क्षेत्र में हमारे पास अनगिनत अवसर हैं। आपको बस इस पर और ज्यादा ध्यान देना होगा, रिसर्च करनी होगी और नए-नए आइडिया लाने होंगे। इस क्षेत्र में अवसरों की कोई कमी नहीं है। अगर आप एक उद्यमी के तौर पर देखें तो मेरा संदेश यह है कि सफलता कोई एक रात में मिलने वाली चीज नहीं है। यह एक लंबी यात्रा है। इसके लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है।
उन्होंने कहा कि मैंने भी 8-10 साल तक कड़ी मेहनत की है। मुझे लगता है कि मैं इस सफलता की हकदार हूं। मैं प्रधानमंत्री की आभारी हूं कि उन्होंने मेरे काम को पहचाना। उन्होंने कहा कि कड़ी मेहनत करें और सब्र रखें। जब आप कोई स्टार्टअप शुरू करते हैं तो यह न सोचें कि आपको रातों-रात सफलता मिल जाएगी। असल में, काम इस तरह से नहीं होता। आपको कड़ी मेहनत करनी होगी और धैर्य रखना होगा। जब आपका काम खुद-ब-खुद बोलने लगेगा तो आपको अपने बारे में कुछ भी कहने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
--आईएएनएस
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