नई दिल्ली, 21 अक्टूबर (आईएएनएस) न्यूजीलैंड के पूर्व तेज गेंदबाज शेन बॉन्ड का मानना है कि चार साल बाद भारतीय टीम में वापसी कर रहे अनुभवी तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार नई गेंद के साथ घातक साबित हो सकते हैं। अगर न्यूजीलैंड में शुरुआती सीजन की पिचें स्विंग और सीम में मदद करती हैं, तो भुवनेश्वर का अनुभव भारतीय गेंदबाजी लाइन-अप को और अधिक संतुलित बनाएगा।
भुवनेश्वर हाल ही में बेंगलुरु में वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज के निर्णायक मैच में वे टीम का हिस्सा थे, लेकिन वह मैच बारिश के कारण धुल गया था। 2025 और 2026 में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) के लगातार आईपीएल खिताब जीतने में भुवनेश्वर के शानदार प्रदर्शन ने उन्हें न्यूजीलैंड के टी20 इंटरनेशनल दौरे के लिए टीम में वापसी दिलाई है।
शेन बॉन्ड ने 'आईएएनएस' के साथ एक खास बातचीत में कहा, "भुवनेश्वर की अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी देखकर बहुत अच्छा लगा। वह एक बेहतरीन गेंदबाज हैं और लंबे समय से आईपीएल में शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। टीम में उनके जैसा खिलाड़ी होने से एक तरह का ठहराव और शांति आती है। उन्होंने कई बार अहम मौकों पर गेंदबाजी की है और ऐसे पलों में वे हमेशा शांत और संयमित नजर आते हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "टीम में एक सीनियर गेंदबाज का होना हमेशा अच्छा होता है, खासकर डेथ ओवरों में, जहां कप्तान उन पर भरोसा कर सकते हैं। वह निश्चित रूप से बहुत उत्साहित होंगे और टीम में वापसी के हकदार भी हैं। मैं उन्हें गेंदबाजी करते हुए देखने के लिए उत्सुक हूं, खासकर उन परिस्थितियों में जहां गेंद स्विंग और सीम हो सकती है। नई गेंद के साथ वह बेहद घातक हो सकते हैं, और इसके अलावा वे एक बेहतरीन 'फिनिशर' (डेथ ओवर स्पेशलिस्ट) भी हैं।"
बॉन्ड को यह भी लगता है कि टी20 इंटरनेशनल सीरीज का समय तेज गेंदबाजों के लिए काफी मददगार साबित होगा। उन्होंने कहा, "अगर आप भारत के खिलाफ उनके घर में खेल रहे हैं, तो साल का यह समय तेज गेंदबाजों के लिए काफी अच्छा हो सकता है, क्योंकि भारतीय टीम की बल्लेबाजी लाइन-अप बहुत मजबूत है।"
बॉन्ड ने आगे कहा, "न्यूजीलैंड में आमतौर पर यही बात जीत-हार तय करती है - जिस टीम के तेज गेंदबाज बेहतर प्रदर्शन करते हैं, उसके सीरीज जीतने के चांस अधिक होते हैं। यहां अभी सीजन की शुरुआत है और आप अलग-अलग तरह की पिचों पर खेल रहे हैं - कहीं 'ड्रॉप-इन' पिचें हैं, तो कहीं पारंपरिक विकेट, साथ ही क्राइस्टचर्च और अन्य जगहों पर मैदानों का साइज भी अलग-अलग है। हालांकि, मुझे पूरी उम्मीद है कि यहां गेंद में उछाल और थोड़ा मूवमेंट (स्विंग या सीम) देखने को मिलेगा।"
बॉन्ड ने बताया कि सबसे छोटे फॉर्मेट (टी20) में भी गेंदबाजों की लेंथ लगभग एक जैसी ही रहती है। हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्राइस्टचर्च, वेलिंगटन, ऑकलैंड और हैमिल्टन में पिचें कैसी होंगी। उन्होंने कहा, "आमतौर पर टी20 इंटरनेशनल में गेंदबाज अपनी लेंथ में ज्यादा बदलाव नहीं करते। वह 6-7 मीटर की लेंथ पर गेंद डालने की कोशिश करते हैं। अगर पिच पर थोड़ा भी मूवमेंट और बाउंस हो, तो इस लेंथ पर गेंदबाजी करना बल्लेबाजों के लिए सबसे मुश्किल होता है। इसके अलावा, बल्लेबाज भी मैदान पर उतरकर आक्रामक रुख अपनाएंगे। वह कोशिश करेंगे कि आप अपनी उस तय लेंथ से भटक जाएं और आपको कुछ अलग करने पर मजबूर कर दें। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या विकेटों से स्विंग और सीम मिलेगी?"
उन्होंने आगे कहा, "अगर आप लगातार सही लेंथ पर गेंद डालते हैं और गेंद मूव भी करती है, तो बल्लेबाज के लिए खेलना बहुत मुश्किल हो जाता है। इसी कारण इस सीरीज में खासकर साल के इस समय यह एक ऐसी चीज है जिसके बारे में अभी कुछ पक्का नहीं कहा जा सकता। तेज गेंदबाजों को यहां काफी मूवमेंट मिलने वाला है, और इसका सीरीज के नतीजों पर क्या असर पड़ता है, यह देखना दिलचस्प होगा।"
बॉन्ड का मानना है कि 2028 में ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की संयुक्त मेजबानी में होने वाले अगले टी20 वर्ल्ड कप से पहले, यह टी20 इंटरनेशनल सीरीज भारत के युवा तेज गेंदबाजों के लिए एक बेहतरीन रिहर्सल साबित हो सकती है। उन्होंने कहा, "जाहिर है कि प्रिंस यादव जैसे खिलाड़ियों ने आईपीएल में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है। कुल मिलाकर, भारतीय बॉलिंग अटैक में तेज गेंदबाजों की अच्छी मौजूदगी है। उनके पास निश्चित रूप से रफ्तार है। अगर हम न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया में होने वाले अगले वर्ल्ड कप की बात करें, तो यह कुछ युवा गेंदबाजों को यहां लाने का एक अच्छा मौका है। इससे उन्हें वहां के हालात, ट्रेनिंग के माहौल, न्यूजीलैंड में यात्रा करने और खाने-पीने की जगहों के बारे में अनुभव मिलेगा, जो आगे चलकर उन्हें उस वर्ल्ड कप टीम में जगह बनाने में मदद कर सकता है।"
पूर्व कीवी गेंदबाज ने कहा, "यहां का अनुभव होने से काफी फर्क पड़ सकता है। इसके अलावा, भारत 'ए' टीम भी अभी यहीं मौजूद है। जब कोई बड़ा टूर्नामेंट आने वाला हो - जो अब से बस डेढ़ साल दूर है - तो ये सभी छोटी-छोटी चीजें बहुत मायने रखती हैं। दोनों ही टीमों के पास बेहतरीन तेज गेंदबाज हैं, और यह बात तीनों फॉर्मेट में लागू होती है।"
बॉन्ड ने कहा कि भारत के बल्लेबाजों और फील्डरों को सबसे ज्यादा तालमेल बिठाना होगा, क्योंकि उनके पास क्राइस्टचर्च में प्रैक्टिस करने के लिए बहुत कम समय है। उन्होंने कहा, "भारत को यहां की पिच की गति, उछाल और शायद गेंद की मूवमेंट के हिसाब से खुद को ढालना होगा। ठंड भी एक अहम फैक्टर हो सकती है। मैच देर से शुरू हो रहे हैं और न्यूजीलैंड में साल के इस समय मौसम काफी ठंडा और हवादार हो सकता है। इसी वजह से खासकर घरेलू सीरीज खेलकर आने के बाद फील्डिंग करने वालों के लिए यह थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है। गेंदबाजी के मामले में चीजें थोड़ी आसान होती हैं - क्योंकि लेंथ में बहुत ज्यादा बदलाव नहीं होता। हालांकि, बल्लेबाजों के लिए यह एक बड़ी चुनौती है, खासकर सीजन की शुरुआत में खेलते समय।"
बॉन्ड का मानना है कि मैदानों का अलग-अलग आकार भारत और न्यूजीलैंड दोनों की टीम चयन और रणनीति को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने कहा, "न्यूजीलैंड में खेलने की एक मुश्किल बात मैदानों का आकार है। हैमिल्टन का मैदान कुछ-कुछ चिन्नास्वामी स्टेडियम जैसा है - सच कहें तो, दोनों में थोड़ी समानता है। ईडन पार्क शायद सबसे बड़ा मैदान है, जहां सामने की बाउंड्री लगभग 45 मीटर की है, और खिलाड़ियों को अक्सर यहां खेलने में परेशानी होती है।
"भले ही पिच पर गति और उछाल हो, लेकिन स्पिनरों के लिए यहां गेंदबाजी करना काफी मुश्किल होता है। बल्लेबाज अक्सर स्टंप्स के ऊपर से शॉट मारने की कोशिश करते हैं, क्योंकि विकेट के दोनों तरफ बाउंड्री काफी बड़ी होती है। ईडन पार्क और वेलिंगटन में 'ड्रॉप-इन' पिचें हैं, जो एक अलग तरह की चुनौती पेश करती हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "क्राइस्टचर्च का मैदान पारंपरिक आकार का है और यहां की पिच भी सामान्य है, इसलिए सीरीज की शुरुआत करने के लिए यह एक अच्छी जगह है। हालांकि, अगर पिच अच्छी है और मैदान छोटे हैं, तो खूब रन बनेंगे। बस आपको मैदान पर उतरकर अपनी योजनाओं को सही ढंग से लागू करना होगा। आईपीएल में इतने सारे रन बनते देखकर, दोनों ही टीमें अब इसके आदी हो चुकी हैं। इसी वजह से आप हाई-स्कोरिंग मैचों की उम्मीद कर सकते हैं, खासकर सीरीज के आखिरी हिस्से में, जब टीमें लय में आ चुकी होंगी और दर्शक भी तो यही देखना चाहते हैं।"
--आईएएनएस
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