माथे पर चांद और गले में मखाने की माला से बाबा महाकाल का शृंगार, भक्तों ने लगाए हर-हर महादेव के जयकारे

माथे पर चांद और गले में मखाने की माला से बाबा महाकाल का शृंगार, भक्तों ने लगाए हर-हर महादेव के जयकारे

उज्जैन, 4 जनवरी (आईएएनएस)। नववर्ष के पहले रविवार को उज्जैन स्थित बाबा महाकाल के मंदिर में भक्तों का सैलाब उमड़ा। साल का पहला रविवार होने की वजह से दूर-दूर से भक्त महाकाल के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।

देर रात से भस्म आरती में शामिल होने के लिए भक्तों को लाइनों में लगा देखा और सर्द मौसम भी भक्तों का उत्साह कम नहीं कर पाया। बाबा महाकाल के अद्भुत दर्शन से भक्तों का मन श्रद्धा से भर उठा और सभी के "हर-हर महादेव" के उद्घोष से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा।

माघ मास कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि रविवार के दिन बाबा का अद्भुत शृंगार किया, जिसे देखकर भक्त मोहित हो उठे। पहले मंदिर के पुजारियों ने बाबा वीरभद्र से आज्ञा लेकर मंदिर के कपाट खोले और गर्भगृह में मौजूद बाकी देवी-देवताओं की पूजा की, जिसके बाद बाबा पर घी, जल, दूध, दही और रस से जलाभिषेक किया और भांग की सहायता से बाबा का शृंगार किया। बाबा के माथे पर बेलपत्र और चांदी का चांद भी लगाया, जिससे बाबा के दिव्य स्वरूप की अनुभूति हुई।

शृंगार पूरा होने के बाद भस्म आरती हुई और भस्म से बाबा को नहलाया गया। माना जाता है कि भस्म आरती के दौरान बाबा निराकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं, लेकिन अपना पूर्ण शृंगार कर वे साकार रूप में भक्तों के कष्टों को हरते हैं।

आज बाबा महाकाल कमल और मखाने की माला से भी सजे, फिर भस्म रमाकर आलोकिक श्रंगार में दर्शन दिए, जिससे पूरा मंदिर परिसर जय श्री महाकाल की गूंज से गुंजायमान हो गया। बता दें कि हर दिन बाबा का शृंगार अलग तरीके से किया जाता है। हर तिथि और शुभ दिन के अनुसार बाबा नए रूपों में भक्तों को दर्शन देते हैं, और यही वजह है कि भस्म आरती में सबसे ज्यादा श्रद्धालु शामिल होते हैं। बाबा की सेवा में सुबह से लेकर शाम तक 6 आरतियां शामिल होती हैं, जो अपने आप में अनोखी होती है।

बीते दिन बाबा का चांद और सूर्य के साथ राजा स्वरूप अद्भुत शृंगार किया गया था, जो बहुत ही अलौलिक था।

--आईएएनएस

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