मुंबई, 25 सितंबर (आईएएनएस)। पिछले दिन की बड़ी गिरावट के बाद हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार बढ़त के साथ हरे निशान में बंद हुआ। इस दौरान प्रमुख बेंचमार्क निफ्टी और सेंसेक्स में 0.43 प्रतिशत तक की तेजी देखने को मिली।
पश्चिम एशिया में लगातार हमलों के बावजूद अमेरिका-ईरान युद्धविराम की उम्मीदों के बीच तेल की कीमतों में गिरावट के चलते प्रमुख बेंचमार्क सूचकांक दिन के उच्च स्तर पर बंद हुए।
सेंसेक्स 315.20 अंक यानी 0.43 प्रतिशत बढ़कर 73,895.74 पर पहुंच गया, तो वहीं निफ्टी 50 77.40 अंक यानी 0.34 प्रतिशत चढकर 23,140.50 पर पहुंच गया।
दिन के कारोबार में सेंसेक्स अपने पिछले बंद 73,580.54 से मामूली 54.61 अंक गिरकर 73,525.92 पर खुला और दिन के सत्र में इसने 387.51 अंक यानी 0.52 प्रतिशत की तेजी के साथ 73,968.05 का उच्चतम स्तर छुआ।
वहीं, निफ्टी अपने पिछले बंद 73,968.05 से 28 अंक यानी 0.12 प्रतिशत गिरकर 23,035 पर खुला और इंट्रा-डे ट्रेडिंग में इसने 99.60 अंक यानी 0.43 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23,162.70 का उच्चतम स्तर छुआ।
इस दौरान, व्यापक बाजार में मिला-जुला कारोबार देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप 100 में 0.14 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप में 0.15 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
सेक्टरवार देखें तो निफ्टी रियल्टी और निफ्टी ऑटो में सबसे ज्यादा तेजी देखी गई, जबकि निफ्टी सीमेंट, निफ्टी मीडिया, निफ्टी आईटी और निफ्टी फार्मा में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई।
निफ्टी50 में एक्सिस बैंक, एशियन पेंट्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज फाइनेंस, एचसीएल टेक, पावरग्रिड, टाइटन और इंडिगो के शेयर टॉप गेनर्स की लिस्ट में शामिल रहे, जबकि मैक्स हेल्थ, टीएमपीवी, इंफोसिस, ओएनजीसी और ट्रेंट के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली।
एक मार्केट एक्सपर्ट के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और बॉन्ड यील्ड के ऊंचे स्तर पर बने रहने के कारण बाजार में रिकवरी सीमित रही। महंगाई, विदेशी फंड की निकासी और उभरते बाजारों (ईएम) की करेंसी पर दबाव की चिंताएं बनी रहीं। हालिया गिरावट के बाद चुनिंदा शेयरों में खरीदारी से बाजार का रुख सकारात्मक बना रहा, हालांकि बढ़त एक सीमित दायरे तक ही सीमित रही।
एक्सपर्ट ने बताया कि बेंचमार्क इंडेक्स का मनोवैज्ञानिक रूप से 23,000 के स्तर से ऊपर बने रहना घरेलू मजबूती और मजबूत घरेलू लिक्विडिटी से मिल रहे समर्थन को दर्शाता है। हालांकि तेल की ऊंची कीमतें और ग्लोबल यील्ड निकट भविष्य में जोखिम लेने की क्षमता को कम कर सकती हैं, लेकिन बेहतर वैल्यूएशन और घरेलू विकास की मजबूत संभावनाएं चुनिंदा खरीदारी को बढ़ावा दे रही हैं, जिससे बाजार बाहरी दबावों को बेहतर ढंग से झेल पा रहा है।
--आईएएनएस
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