महाशिवरात्रि पर काशी में शुरू हुई अनूठी परंपरा, भेजा गया सभी देवी-देवताओं को आमंत्रण

महाशिवरात्रि पर काशी में शुरू हुई अनूठी परंपरा, भेजा गया सभी देवी-देवताओं को आमंत्रण

वाराणसी, 10 फरवरी (आईएएनएस)। 15 फरवरी को देशभर में पूरी श्रद्धा के साथ मनाए जाने वाला महाशिवरात्रि का पावन पर्व इस बार बेहद खास और भव्य होने वाला है क्योंकि इस बार काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास की तरफ से अनूठी परंपरा की शुरुआत की गई है।

मंदिर न्यास द्वारा समस्त ब्रह्मांड की सनातन, सात्त्विक एवं शिव-अनुग्रही शक्तियों को आमंत्रण पत्र के माध्यम से काशी विश्वनाथ धाम में शिवरात्रि के दिन बाबा के विवाह समारोह में आमंत्रित किया गया है।

इस पावन आमंत्रण को काशी विश्वनाथ धाम में विराजमान सभी देव विग्रहों के समक्ष सादर प्रस्तुत किया गया। इसके साथ ही महाशिवरात्रि महोत्सव के लिए एक विशेष मंत्र-श्लोक की रचना की गई है, जिसके माध्यम से देवताओं का आह्वान किया जा रहा है। कार्ड पर "फाल्गुने कृष्णपक्षेस्मिन् शिवरात्रिमहोत्सवे, शिवशक्तिमयान् देवान् प्रणुमोऽनुग्रहेच्छया। विश्वनाथस्य सेवायां शुभाशीराशिकांक्षया। आमन्त्रणे समायान्तु काशीधाम्नि समागते मंत्र छपवाकर आमंत्रण दिया गया है।"

काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्रा ने जानकारी देते हुए बताया कि "सभी देवताओं को आमंत्रित करने के लिए एक संस्कृति श्लोक तैयार किया है, जिसे कार्ड के रूप में प्रिंट कराकर मंदिर के अंदर विराजमान सभी विग्रहों के सामने अर्पित किया है। श्लोक को बनाने के लिए अध्यात्म और संस्कृति के ज्ञाताओं की मदद ली गई है।"

उन्होंने आगे बताया, "सबसे पहले आमंत्रण कार्ड को मंदिर के भीतर मौजूद 15 विग्रह को अर्पित किया गया और आने का आमंत्रण दिया। जो देवता मंदिर के बाहर हैं, उनके लिए पब्लिक एड्रेस सिस्टम की सहायता से 2 घंटे तक जारी किया गया है। कार्ड में छपे श्लोक और उसके उद्घोष के माध्यम से हमारी प्रार्थना सीधे देवताओं तक पहुंचती है।" उन्होंने काशीवासियों से भी अपील की है और कहा कि इस महोत्सव का हिस्सा बनें और आने वाले श्रद्धालुओं का स्वागत करें।"

उन्होंने कहा, "जब भी देवी-देवता धरती पर आते हैं तो रूप धारण करके आते हैं। कभी पुरुष, कभी साधु, या कभी गरीब। ऐसे में जहां भी कोई परेशान इंसान दिखे तो उसकी सहायता जरूर करें क्योंकि नहीं पता कि किस रूप में भगवान आ जाएं। बता दें कि ये पहला मौका है जब शिव विवाह को भव्य बनाने के लिए पूरी विधि-विधान के साथ देवताओं को बुलाने का कार्य किया गया है।

--आईएएनएस

पीएस/एएस