माघ माह में बढ़ जाता है तिल का महत्व, यहां समझें धर्म और आयुर्वेद का गणित

Magh me til, til benefit

नई दिल्ली, 14 जनवरी (आईएएनएस)। माघ मास में ठंड सबसे ज्यादा पड़ती है। लिहाजा, शीतजनित रोगों का प्रकोप भी बढ़ जाता है। ऐसे समय में गर्म तासीर वाली तिल का उपयोग धर्म और आयुर्वेद दोनों में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। मकर संक्रांति, तिल द्वादशी, गणेश चौथ जैसे त्योहारों में तिल से स्नान, दान, पूजा और भोजन करने का विशेष पुण्य मिलता है।

माघ माह में ठंड के कारण वात दोष बढ़ जाता है, जिससे शरीर में सूखापन, दर्द और थकान होती है। तिल की गर्म तासीर और तैलीय गुण इन समस्याओं को दूर करते हैं। धर्म शास्त्रों में इस महीने तिल का दान, तिल से स्नान और तिल-गुड़ के लड्डू खाना बहुत पुण्यदायी बताया गया है। गणेश चतुर्थी पर गणपति को तिल के लड्डू चढ़ाने का महत्व है। वहीं, संक्रांति, षटतिला एकादशी पर तिल को छह प्रकार से इस्तेमाल का वर्णन मिलता है।

तिल का छह तरह से उपयोग करने की परंपरा है। पहला तिल मिले हुए पानी से स्नान करना। शरीर पर तिल का लेप लगाना। हवन में तिल की आहुति देना। ब्राह्मण या जरूरतमंद लोगों को तिल दान करना। व्रत के नियमों के अनुसार तिल से बने व्यंजन खाना और तिल मिश्रित जल पीना या पितरों को तर्पण करना शामिल है। ये सभी कार्य करने से व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक लाभ मिलते हैं।

धर्म कहता है कि जो लोग नदी स्नान नहीं कर पाते, वे घर पर तिल मिलाकर स्नान करें तो भी संक्रांति का पूरा फल मिलता है। आयुर्वेद में तिल को 'सर्वदोष हारा' भी कहा जाता है, क्योंकि यह शरीर को पोषण देता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। माघ में तिल का सेवन न सिर्फ धार्मिक पुण्य देता है, बल्कि सेहत के लिए भी वरदान साबित होता है।

आयुर्वेदाचार्य के अनुसार, तिल की तासीर गर्म होती है। यह शरीर में गर्मी पैदा करती है, जिससे सर्दी-खांसी, जोड़ों का दर्द और ठंड से होने वाली कमजोरी दूर रहती है। तिल वात और कफ दोष को संतुलित करता है, जबकि पित्त को थोड़ा बढ़ा सकता है, इसलिए गर्मी में कम इस्तेमाल करें। यह भारी, तैलीय और पौष्टिक होता है, जो ऊतकों को नमी देता है और शरीर को मजबूती प्रदान करता है।

तिल में भरपूर मात्रा में कैल्शियम, आयरन, विटामिन ई और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। रोजाना तिल खाने या तिल के तेल से मालिश करने से हड्डियां मजबूत होती हैं, दांत स्वस्थ रहते हैं और बालों का झड़ना कम होता है। यह पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है, कब्ज दूर करता है और पेट की गैस-एसिडिटी में राहत देता है। तिल का तेल त्वचा को नरम बनाता है, घाव भरने में मदद करता है और एंटी-एजिंग गुणों से त्वचा को जवां रखता है।

--आईएएनएस

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