नई दिल्ली, 21 अप्रैल (आईएएनएस)। वसंत के आते ही जापान का माहौल बदल जाता है। इस मौसम में जापान चेरी ब्लॉसम सीजन के लिए मशहूर है, जिसमें पिंक, पर्पल, और व्हाइट कलर के बड़े 'सकुरा' फूलों से पेड़ और धरती दोनों खिल उठते हैं।
जापान जैसे चेरी ब्लॉसम सीजन का मजा भारत में देखने को मिल जाए तो कैसा रहेगा? अप्रैल से लेकर मई के महीने में लेह-लद्दाख की घाटियों में कई चेरी ब्लॉसम देखने को मिल जाते हैं, जिन्हें वहां के लोग त्योहार के रूप में मनाते हैं।
स्कर्बुचन, लेह-लद्दाख के मध्य में स्थित शाम घाटी के पास बसा एक गांव है, जहां का मौसम और वहां रहने वाले लोग आज भी समृद्ध सांस्कृतिक जीवन व्यतीत करते हैं। गांव विशाल चारागाहों से घिरा हुआ है। इस गांव का अपना एक इतिहास भी है। लेह से पश्चिम दिशा में 65.5 किलोमीटर की दूरी पर बसे स्कर्बुचन, ऊंची इमारतों, अपने आध्यात्मिक मठों और जनजातियों के लिए प्रसिद्ध है।
गांव में कई आध्यात्मिक मठ और मंदिर हैं, जिनका निर्माण भव्य संरचना के आधार पर हुआ है। स्थानीय आबादी और आसपास के समुदायों के लिए इसका उच्च ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व है। यहां आज भी इमारतें मिट्टी से बनी हैं, जिन्हें विस्तार के बाद पत्थरों और मिट्टी से मिलाकर बनाया गया।
स्कर्बुचन अपने वसंत के मौसम में खुमानी के पेड़ों पर सफेद और गुलाबी फूलों के लिए प्रसिद्ध है। खुमानी फूलों से धरती भी सफेद और गुलाबी रंगों में रंग जाती है। ऐसे में वसंत के स्वागत के लिए जनजाति लोग स्थानीय फेस्टिवल सेलिब्रेट करते हैं, जिसमें पारंपरिक पोशाक पहनकर सिर पर फूलों का ताज पहना जाता है। अलग-अलग समुदाय के लोग मिलकर प्रकृति को धन्यवाद देते हैं और पारंपरिक खाना खाते हैं।
इसके साथ ही लद्दाख में 'ममानी जातीय खाद्य महोत्सव' मनाने की परंपरा भी कई सालों से चली आ रही है। यह महोत्सव मुख्य रूप से लद्दाख की छिपी हुई खानपान संस्कृति, स्थानीय व्यंजनों और सामुदायिक सद्भाव को पुनर्जीवित करने के लिए मनाया जाता है।
खास बात यह है कि इस महोत्सव में सभी समुदायों के लोग मिलकर पारंपरिक भोजन बनाते हैं और साथ में उत्सव को सेलिब्रेट करते हैं। यह महोत्सव सिर्फ संस्कृति को जीवित रखने का ही प्रतीक नहीं, बल्कि समुदायों के बीच भाईचारा भी स्थापित करता है।
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