क्या है जलवायु परिवर्तन, क्यों बदल रहा है धरती का मिजाज?

क्या है जलवायु परिवर्तन, क्यों बदल रहा है धरती का मिजाज?

नई दिल्ली, 1 मई (आईएएनएस)। जलवायु परिवर्तन आज पूरी दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। सरल शब्दों में कहें तो जलवायु परिवर्तन का मतलब है लंबे समय तक किसी इलाके या पूरी पृथ्वी की औसत मौसम स्थितियों में होने वाला स्थायी बदलाव। इसमें तापमान, बारिश, सूखा और मौसम के पैटर्न में बदलाव शामिल हैं।

जलवायु परिवर्तन के बारे में समझने से पहले यह जानना जरूरी है कि मौसम और जलवायु में बड़ा अंतर है। मौसम का मतलब है किसी खास दिन या छोटे समय में बाहर की स्थिति जैसे आज बारिश हो रही है या धूप निकली है। वहीं, जलवायु का मतलब है किसी जगह पर कई सालों (आमतौर पर 30 साल या उससे ज्यादा) में औसत मौसम की स्थिति। उदाहरण के लिए, फीनिक्स शहर में आमतौर पर सूखा और गर्म मौसम रहता है। अगर एक हफ्ते बारिश हो जाए तो भी वहां की जलवायु रेगिस्तानी ही मानी जाएगी।

पृथ्वी की जलवायु हमेशा से बदलती रही है। हजारों साल पहले हिमयुग था, जब आज के अमेरिका का बड़ा हिस्सा बर्फ से ढका हुआ था। लेकिन अब वैज्ञानिक चिंता इस बात को लेकर है कि पृथ्वी की जलवायु बहुत तेज गति से बदल रही है। पिछले 100 सालों में वैश्विक तापमान 2 डिग्री फारेनहाइट से ज्यादा बढ़ चुका है। पिछले कुछ साल इतिहास के सबसे गर्म साल साबित हुए हैं।

वैज्ञानिकों के अनुसार, पिछले 100 सालों में पृथ्वी के तेजी से गर्म होने का सबसे बड़ा कारण ग्रीनहाउस गैसों में वृद्धि है। मनुष्य द्वारा की गई गतिविधियां जैसे कोयला, पेट्रोल और डीजल का अत्यधिक उपयोग, फैक्ट्रियां, कारें, बसें और जंगलों की कटाई कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन आदि गैसों को वायुमंडल में बढ़ा रही हैं। ये ग्रीनहाउस गैसें सूरज की गर्मी को पृथ्वी के वायुमंडल में रोक लेती हैं, जिससे धरती का तापमान बढ़ता जाता है। इसे ग्रीनहाउस प्रभाव कहते हैं। प्राकृतिक रूप से यह प्रभाव पृथ्वी को रहने योग्य बनाए रखता है, लेकिन मानवीय गतिविधियों ने इसे असंतुलित कर दिया है।

जलवायु परिवर्तन की वजह से समुद्र का जलस्तर बढ़ना, ग्लेशियरों और बर्फ की चादरों का तेजी से पिघलना, लू, सूखा और बाढ़ जैसी घटनाओं में बढ़ोतरी, बारिश के पैटर्न में बदलाव, पौधों और फूलों के खिलने के समय में परिवर्तन आदि शामिल है।

अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा, भारतीय स्पेस एजेंसी इसरो समेत दुनिया भर के वैज्ञानिक सैटेलाइट, हवाई जहाज, मौसम स्टेशन और जमीन पर लगे उपकरणों से निरंतर निगरानी करते हैं। इसके अलावा वे बर्फ की चादरों और समुद्र तल से बर्फ कोर तथा तलछट कोर निकालकर हजारों साल पुरानी जानकारी भी अध्ययन करते हैं। इन सबसे साफ पता चलता है कि पृथ्वी पहले की तुलना में बहुत तेज गति से गर्म हो रही है।

जलवायु परिवर्तन अब कोई ऐसी समस्या नहीं रह गई जो बहुत दूर है। यह हमारे रोजमर्रा के मौसम, कृषि, पानी की उपलब्धता और समुद्री जीवन को सीधे प्रभावित कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को तुरंत नियंत्रित नहीं किया गया तो आने वाले समय में इसके और गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं।

--आईएएनएस

एमटी/एएस