मुंबई, 19 जनवरी (आईएएनएस)। साउथ फिल्म इंडस्ट्री में कई सुपरस्टार हुए हैं, लेकिन दिवंगत अभिनेता कृष्णम राजू का नाम खास है। उन्हें 'रिबेल स्टार' कहा जाता है क्योंकि उनकी फिल्मों में विद्रोही और मजबूत किरदारों ने दर्शकों को बहुत प्रभावित किया। उन्होंने 50 साल से ज्यादा के करियर में 180 से अधिक फिल्मों में काम किया। सामाजिक, रोमांटिक, धार्मिक और ऐतिहासिक फिल्मों में उन्होंने कमाल का अभिनय किया।
'भक्त कन्नप्पा', 'तंद्रा पपरायुडु' जैसी फिल्मों ने उन्हें घर-घर पहुंचाया। सिनेमा के अलावा, वह राजनीति में भी सक्रिय रहे और केंद्रीय मंत्री बने। कृष्णम राजू का जन्म 20 जनवरी 1940 को आंध्र प्रदेश के पश्चिम गोदावरी जिले के मोगाल्तुरु गांव में हुआ था। कृष्णम राजू ने पांच दशकों से ज्यादा के करियर में 180 से अधिक फिल्मों में काम किया, फिल्म निर्माण किया और राजनीति में भी सफलता हासिल की। वह सुपरस्टार प्रभास के चाचा थे और उनकी आखिरी फिल्मी उपस्थिति प्रभास की 'राधे श्याम' में देखने को मिली थी।
उनके करियर की खासियत यह रही कि वे हर तरह की भूमिका में फिट बैठते थे और दर्शकों के साथ गहरा जुड़ाव बनाए रखा। कृष्णम राजू ने साल 1966 में फिल्म 'चिलाका गोरिंका' से अभिनय की शुरुआत की, जिसे नंदी अवॉर्ड भी मिला। करियर की शुरुआत में उन्होंने नायक और खलनायक दोनों भूमिकाएं निभाईं, लेकिन जल्द ही वह तेलुगू सिनेमा में एक मजबूत और विद्रोही छवि के अभिनेता के रूप में स्थापित हो गए। इसी वजह से उन्हें 'रिबेल स्टार' का खिताब मिला। उन्होंने सामाजिक, पारिवारिक, रोमांटिक और थ्रिलर से लेकर ऐतिहासिक और पौराणिक फिल्मों में भी काम किया।
उनकी कुछ सबसे यादगार फिल्मों में 'अमारा दीपम', 'सीता रामुलु', 'कटकताला रुद्रैया', 'भक्त कन्नप्पा' और 'तंद्रा पपरायुडु' शामिल हैं। 'तंद्रा पपरायुडु' के लिए उन्हें 1986 में फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार मिला। इसके अलावा वे दो बार आंध्र प्रदेश सरकार के नंदी पुरस्कार से सम्मानित हुए। साल 2006 में उन्हें फिल्मफेयर साउथ लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से नवाजा गया।
कृष्णम राजू ने अपने बैनर 'गोपी कृष्णा मूवीज' के तहत कई फिल्मों का निर्माण भी किया, जिससे उन्होंने प्रोड्यूसर के रूप में भी अपनी पहचान बनाई। उनकी फिल्में, खासकर 'भक्त कन्नप्पा' जैसी धार्मिक फिल्मों ने उन्हें लोगों के बीच खास बनाया।
सिनेमा के अलावा कृष्णम राजू ने राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभाई। साल 1992 में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर नरसापुरम लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। बाद में 1999 में वे भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल हो गए और उसी सीट से जीत हासिल की। वे 1999 से 2004 तक अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे।
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