नी मूवमेंट: घुटनों और जॉइंट्स की ताकत बढ़ाने का आसान तरीका, ये सावधानी जरूरी

नी मूवमेंट: घुटनों और जॉइंट्स की ताकत बढ़ाने का आसान तरीका, ये सावधानी जरूरी

नई दिल्ली, 3 जनवरी (आईएएनएस)। आज की अनियमित दिनचर्या और गड़बड़ खानपान से शरीर कमजोर हो रहा है, जिसका सबसे पहले असर घुटनों और कूल्हे के जोड़ों पर पड़ता है। इनमें दर्द और कमजोरी आम समस्या बन गई है, लेकिन योग का सरल अभ्यास 'नी मूवमेंट' या समस्थिति इन समस्याओं को आसानी से मात दे सकता है।

भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, नी मूवमेंट घुटनों और हिप जॉइंट्स को मजबूत बनाता है, स्थिरता बढ़ाता है और निचले शरीर की ताकत सुधारता है। 'नी मूवमेंट' या 'समस्थिति' (सतर्क मुद्रा) नामक यह आसन घुटनों और कूल्हे के जोड़ों को मजबूत बनाने में बेहद उपयोगी है। यह आसान अभ्यास निचले शरीर की स्थिरता बढ़ाता है और ताकत प्रदान करता है। इसे योग की आधारभूत मुद्रा माना जाता है।

एक्सपर्ट के अनुसार नी मूवमेंट अभ्यास करने के लिए सीधे खड़े होकर पैरों को जोड़ लें, हाथों को शरीर के बगल में रखें और नजर सामने रखें। इस मुद्रा में शरीर को पूरी तरह संतुलित रखना होता है, जिससे शरीर की नींव मजबूत होती है।

इसके नियमित अभ्यास से घुटनों और हिप जॉइंट्स में मजबूती आती है, जिससे दैनिक जीवन में बेहतर संतुलन और स्थिरता मिलती है। यह अभ्यास विशेष रूप से उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो लंबे समय तक बैठे रहने की आदत के कारण निचले शरीर में कमजोरी महसूस करते हैं। कई लोग घुटनों और कूल्हों में दर्द की शिकायत करते हैं। ऐसे में नी मूवमेंट इन समस्याओं से निजात दिलाने में मददगार है।

यह मुद्रा न केवल शारीरिक ताकत बढ़ाती है बल्कि मानसिक एकाग्रता भी सुधारती है। विशेषज्ञों का मानना है कि रोजाना कुछ मिनट इस मुद्रा में खड़े रहने से मांसपेशियां मजबूत होती हैं और जोड़ों पर अनावश्यक दबाव कम होता है।

नी मूवमेंट सिर्फ स्थिर खड़े होने की मुद्रा नहीं, बल्कि यह शरीर और मन दोनों के संतुलन के लिए कारगर है। हालांकि, एक्सपर्ट चेतावनी भी देते हैं। यदि किसी व्यक्ति को आर्थराइटिस की गंभीर स्थिति है, तो इस आसन से बचना चाहिए। ऐसे में डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। अन्यथा, स्वस्थ व्यक्ति इसे बिना किसी उपकरण के घर पर आसानी से कर सकते हैं।

--आईएएनएस

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