कैसे तय होता है स्पेस मिशन का मेन्यू, जानें स्पेस फ्लाइट लॉन्च से पहले एस्ट्रोनॉट्स क्यों करते हैं लंच?

कैसे तय होता है स्पेस मिशन का मेन्यू, जानें स्पेस फ्लाइट लॉन्च से पहले एस्ट्रोनॉट्स क्यों करते हैं लंच?

नई दिल्ली, 2 जून (आईएएनएस)। स्पेस मिशन में भोजन केवल भूख मिटाने का साधन नहीं होता, बल्कि यह एस्ट्रोनॉट्स के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का भी अहम हिस्सा होता है। भारतीय वायुसेना के अधिकारी और एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला ने हाल ही में सोशल मीडिया पर 'स्पेस लर्निंग विद एसएचयूएक्स' सीरीज के तहत बताया कि स्पेस मिशन का मेन्यू कैसे तय होता है।

ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट पर 'स्पेस लर्निंग विद एसएचयूएक्स' सीरीज के तहत शुभांशु शुक्ला ने बताया कि स्पेस मिशन से पहले भोजन की विशेष टेस्टिंग की जाती है और लॉन्च से पहले लंच करने की परंपरा भी इसी का हिस्सा है।

शुभांशु शुक्ला ने बताया कि मानव अंतरिक्ष उड़ानों में आज भी एक पुरानी परंपरा कायम है। लॉन्च से पहले सभी एस्ट्रोनॉट्स लंच करते हैं। यह केवल भोजन करने की औपचारिकता नहीं, बल्कि मिशन की तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, जिससे अंतरिक्ष यात्री लंबी यात्रा के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार हो सकें।

शुभांशु शुक्ला के अनुसार, जब कोई एस्ट्रोनॉट कई सप्ताह या महीनों तक एक सीमित और बंद वातावरण में रहता है, तो भोजन उसके लिए केवल पोषण का स्रोत नहीं बल्कि भावनात्मक सहारा भी बन जाता है। अंतरिक्ष में एक जैसी दिनचर्या और सीमित माहौल के बीच पसंदीदा भोजन पृथ्वी की याद दिलाता है और मानसिक राहत प्रदान करता है।

इसी कारण स्पेस मिशन के लिए भोजन का चयन बेहद सावधानी से किया जाता है। उड़ान से पहले एस्ट्रोनॉट्स को 200 से अधिक खाने वाली चीजों का स्वाद चखना पड़ता है। इस प्रक्रिया को 'फूड टेस्टिंग' कहा जाता है। हर खाद्य पदार्थ को एक हेडोनिक स्केल पर रेटिंग दी जाती है, जिससे यह तय किया जाता है कि कौन सा भोजन स्पेस मिशन के दौरान मेन्यू में शामिल किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि यह प्रक्रिया सुनने में जितनी आसान लगती है, वास्तव में उतनी नहीं होती। लगातार सैकड़ों खाद्य पदार्थों का स्वाद लेने के बाद एस्ट्रोनॉट्स का पेट भर जाता है और अंतिम चरण में अच्छे भोजन को भी कम अंक मिल सकते हैं। ऐसे में भोजन का सही मूल्यांकन करना उनके लिए एक बड़ी चुनौती बन जाता है।

शुभांशु ने बताया कि अंतरिक्ष में भोजन का स्वाद पृथ्वी से अलग महसूस होता है। माइक्रोग्रैविटी की वजह से शरीर के तरल पदार्थ सिर की ओर शिफ्ट हो जाते हैं, जिससे हल्की सर्दी जैसा एहसास होने लगता है। इसके कारण सूंघने की क्षमता प्रभावित होती है और स्वाद का अनुभव भी कम हो जाता है। यही वजह है कि पृथ्वी पर स्वादिष्ट लगने वाला भोजन अंतरिक्ष में अपेक्षाकृत फीका महसूस हो सकता है।

उन्होंने कहा कि इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए एस्ट्रोनॉट्स ऐसे खाद्य पदार्थ चुनते हैं जो उन्हें वास्तव में पसंद हों और जिनका स्वाद अंतरिक्ष में भी अच्छा लगे। उनके अनुसार, नाश्ते में ग्रेनोला और ओट्स उनके पसंदीदा विकल्पों में शामिल रहे हैं।

--आईएएनएस

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