इटली: दौलत त्याग गरीबों की सेवा में संत फ्रांसिस ने बिताया था जीवन, उनके अवशेष अब देख पाएगी दुनिया

The body of St. Francis of Assisi

रोम, 22 फरवरी (आईएएनएस)। सेंट फ्रांसिस ऑफ असीसी, यानी इटली स्थित ऐतिहासिक शहर असीसी के संत फ्रांसिस को दुनिया गरीबों का मसीहा मानती है। उन्होंने दौलत त्यागकर अपना जीवन गरीब जनता की सेवा में समर्पित कर दिया था। 13वीं सदी के इस संत को लोग बड़े अदब से याद करते हैं। उनके लिए संत के अवशेषों की झलक भी बड़ी उपलब्धि है। करीब 800 साल बाद उनके अवशेष दुनिया देख पाएगी।

रविवार (22 फरवरी) से उनके अवशेषों को पूरी तरह से पब्लिक डिस्प्ले पर रखा जा रहा है।

14 फरवरी को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चर्च के पुजारियों और अधिकारियों ने बताया था कि नाइट्रोजन से भरे प्लेक्सीग्लास केस के अंदर, जिस पर लैटिन में “कॉर्पस सैंक्टी फ्रांसिसी” (सेंट फ्रांसिस का शरीर/शव) लिखा है, अवशेषों को पहाड़ों में बसे शहर बेसिलिका ऑफ सेंट फ्रांसिस ऑफ असीसी में दिखाया जा रहा है।

सेंट फ्रांसिस, जिनकी मृत्यु 3 अक्टूबर 1226 को हुई थी, ने अपनी दौलत छोड़कर और अपना जीवन गरीबों के लिए समर्पित करने के बाद फ्रांसिस्कन ऑर्डर की स्थापना की थी।

असीसी में फ्रांसिस्कन कॉन्वेंट के कम्युनिकेशन डायरेक्टर गिउलिओ सेसारियो के हवाले से बताया कि उन्हें उम्मीद है कि यह डिस्प्ले आस्तिक और नास्तिक, दोनों के लिए “एक अद्भुत अनुभव” लेकर आएगा।

सेसारियो ने कहा कि हड्डियों की “खराब” हालत दिखाती है कि सेंट फ्रांसिस ने अपने जीवन के काम के लिए “पूरी तरह से खुद को समर्पित कर दिया था।"

उनके अवशेष 22 मार्च तक दिखाए जाएंगे। ये अवशेष 1230 में संत के सम्मान में बने बेसिलिका में ट्रांसफर कर दिए गए थे, लेकिन 1818 में, बहुत ही गुप्त तरीके से की गई खुदाई के बाद, उनकी कब्र फिर से मिली थी।

वैज्ञानिक जांच के लिए पहले की गई खुदाई के अलावा, सेंट फ्रांसिस की हड्डियों को सिर्फ एक बार, 1978 में चंद लोगों को दिखाया गया था। वह भी महज 24 घंटों के लिए खोला गया था।

सेंट फ्रांसिस इटली के संरक्षक संत हैं, और उनकी मौत की 800वीं सालगिरह मनाने के लिए 4 अक्टूबर को फिर से पब्लिक हॉलिडे शुरू किया जाएगा।

फ्रांसिस्कन कॉन्वेंट के गार्डियन मार्को मोरोनी ने कहा कि संत के अवशेष देखने के लिए पहले से ही "दुनिया के सभी हिस्सों से लगभग 4,00,000 (लोग) आ रहे हैं, जिनमें इटली से ज्यादा हैं, लेकिन हमसे ब्राजीलियन, नॉर्थ अमेरिकन और अफ्रीकी लोगों ने भी अनुरोध किया है।"

--आईएएनएस

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