नई दिल्ली, 23 जुलाई (आईएएनएस)। राइड-हेलिंग कंपनी उबर टेक्नोलॉजीज ने आर्टिफिशियल इटेलिजेंस (एआई) आधारित दक्षता बढ़ाने और संगठनात्मक ढांचे को अधिक मजबूत बनाने के लिए अपने ग्राहक सेवा कर्मचारियों में करीब 10 प्रतिशत की कटौती की है।
कई रिपोर्ट्स के अनुसार, ताजा छंटनी उबर के कम्युनिटी ऑपरेशंस डिवीजन में की गई है, जो कस्टमर सपोर्ट प्रदान करता है।
रिपोर्ट्स में आगे कहा गया है कि कंपनी ने इस डिवीजन में काम करने वाले रिमोट कर्मचारियों को अपनी व्यापक रिटर्न-टू-ऑफिस रणनीति के तहत निर्धारित हब कार्यालयों में स्थानांतरित होने के लिए भी कहा है।
यह पुनर्गठन ऐसे समय में किया गया है जब उबर अपनी आंतरिक प्रक्रियाओं को अधिक सुव्यवस्थित करने और परिचालन में एआई के इस्तेमाल का दायरा बढ़ाने पर जोर दे रही है।
रिपोर्ट्स में कंपनी के एक इंटरनल मैसेज के हवाले से बताया गया कि मौजूदा संगठनात्मक ढांचा काफी बिखरा हुआ हो गया था, जिससे अगली पीढ़ी की एआई तकनीकों का पूरा लाभ उठाना मुश्किल हो रहा था।
यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पहली बार उबर ने कर्मचारियों की छंटनी को सीधे अपनी एआई रणनीति से जोड़ा है।
इससे पहले जून में भी कंपनी ने अपने पीपल डिवीजन में करीब 23 प्रतिशत पद समाप्त किए थे, जिसका असर उसके वैश्विक स्तर पर लगभग 34,000 कर्मचारियों में से 1 प्रतिशत से भी कम कर्मचारियों पर पड़ा था।
उबर पहले ही संकेत दे चुकी थी कि कंपनी में एआई के व्यापक इस्तेमाल के कारण नई भर्तियों की रफ्तार धीमी पड़ेगी।
हालांकि, कंपनी अभी भी 500 से अधिक रिक्त पदों के लिए भर्ती कर रही है, जिनमें ऑटोनॉमस मोबिलिटी और रोबोटैक्सी कार्यक्रमों से जुड़े इंजीनियरिंग पद भी शामिल हैं।
उबर की यह नई छंटनी ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक प्रौद्योगिकी उद्योग में भी बड़े पैमाने पर नौकरियों में कटौती का दौर जारी है।
हालिया रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026 के पहले पांच महीनों में दुनिया भर में एक लाख से अधिक तकनीकी नौकरियां खत्म हो चुकी हैं। इनमें केवल मई महीने में ही करीब 28,900 कर्मचारियों की छंटनी हुई। लेऑफ्स डॉट एफवाईआई के आंकड़ों के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर अब तक 1,16,739 तकनीकी कर्मचारी अपनी नौकरी गंवा चुके हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि लागत अनुकूलन, पुनर्गठन और एआई के बढ़ते इस्तेमाल पर ध्यान केंद्रित करने के कारण उबर, मेटा, क्लाउडफ्लेयर, इंट्यूट, पेपाल, सिस्को, क्वोरा और कॉइनबेस जैसी कई बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियां भी कर्मचारियों की संख्या में कटौती की घोषणा कर चुकी हैं।
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