नई दिल्ली, 26 जनवरी (आईएएनएस)। रूस में कामगारों की भारी कमी को देखते हुए वहां की सरकार भारत से ज्यादा मजदूर और कामगार बुलाने की योजना बना रही है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, इस साल करीब 40,000 भारतीय नागरिक काम के लिए रूस जा सकते हैं।
डीडब्ल्यू.कॉम की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल के अंत तक 70,000 से 80,000 भारतीय नागरिक पहले से ही रूस में काम कर रहे थे।
पिछले साल दिसंबर में भारत और रूस के बीच दो अहम समझौतों पर हस्ताक्षर हुए थे। इन समझौतों का मकसद भारत के अर्ध-कुशल और कुशल कामगारों को रूस में काम करने के बेहतर अवसर देना है। ये समझौते हैं, "एक देश के नागरिकों को दूसरे देश में अस्थायी रूप से काम करने की अनुमति" और "अवैध प्रवासन से निपटने में सहयोग"।
इन समझौतों से भारतीय कामगारों को रूस में नौकरी मिलने का एक सुरक्षित ढांचा मिलेगा, ताकि उन्हें पहले की तरह धोखाधड़ी या गलत तरीकों का सामना न करना पड़े।
हाल ही में रूस में काम कर रहे एक युवा भारतीय सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल के सड़क पर काम करने की खबर ने लोगों का ध्यान खींचा था। वह उन 17 भारतीय कामगारों में शामिल था, जो कुछ महीने पहले सेंट पीटर्सबर्ग पहुंचे थे। उन्हें वहां सड़क रखरखाव के काम में लगाया गया था।
रूस के ऐप-आधारित मीडिया प्लेटफॉर्म फोंटांका की रिपोर्ट के अनुसार, इन कामगारों को रूस की एक सड़क रखरखाव कंपनी कोलोम्योज्स्कोये ने भर्ती किया था। उन्हें सड़क सफाई और सर्दियों में सड़कों के रखरखाव जैसे काम सौंपे गए थे।
रूस के कई हिस्सों में श्रमिकों की कमी बढ़ती जा रही है। इसी वजह से वहां नगरपालिका सेवाओं और हाथ से किए जाने वाले कामों में विदेशी कामगारों की मांग बढ़ रही है।
इस बीच, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में कहा कि भारत का उद्यमशील माहौल काफी मजबूत है और भारत के पास दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत के युवा, कुशल और मेहनती कामगार रूस में अनुमानित 30 लाख कुशल पेशेवरों की कमी को पूरा करने में मदद कर सकते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, रूस में इस समय कम से कम 5 लाख अर्ध-कुशल कामगारों की जरूरत है। यही वजह है कि मॉस्को अब दोस्त देशों, खासकर भारत, से संपर्क बढ़ा रहा है।
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