नए किरदार के लिए नया लुक, ऋचा चड्ढा के हेयरस्टाइल ने फैंस को किया हैरान

नए किरदार के लिए नया लुक, ऋचा चड्ढा के हेयरस्टाइल ने फैंस को किया हैरान

मुंबई, 23 जनवरी (आईएएनएस)। बॉलीवुड और ओटीटी की दुनिया में अपने बेबाक अंदाज, अदाकारी और अलग-अलग किरदारों के लिए पहचानी जाने वाली अभिनेत्री ऋचा चड्ढा एक बार फिर सुर्खियों में हैं।

हाल ही में ऋचा को छोटे और स्टाइलिश हेयरकट के साथ देखा गया, जिसने फैंस का ध्यान खींचा। माना जा रहा है कि यह नया लुक किसी फैशन ट्रेंड के लिए नहीं, बल्कि उनके आने वाले बड़े प्रोजेक्ट की तैयारी का हिस्सा है।

ऋचा हमेशा से अपने किरदारों के साथ पूरी ईमानदारी से जुड़ने के लिए जानी जाती हैं और उनके लुक में बदलाव अक्सर किसी खास रोल की ओर इशारा करता है।

ऋचा के करीबी सूत्र ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, ''ऋचा का यह नया छोटा हेयरकट नए ओटीटी प्रोजेक्ट के लिए है, जिसकी शूटिंग फरवरी के पहले हफ्ते से शुरू होगी। यह एक बड़ी वेब सीरीज है, जिसमें ऋचा फीमेल लीड की भूमिका निभाने वाली हैं। इस प्रोजेक्ट को लेकर अभी ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन इतना तय है कि इसमें ऋचा का किरदार काफी मजबूत और अहम होने वाला है। वह जल्द ही इस नए प्रोजेक्ट की आधिकारिक घोषणा भी करने वाली हैं।''

सूत्रों ने कहा, ''वह अपने काम को लेकर बेहद गंभीर हैं और जब भी अपने लुक में बदलाव करती हैं, उसके पीछे कोई रचनात्मक वजह जरूर होती है। उनके लिए अभिनय, किरदार की सोच, उसकी जिंदगी और उसके अंदाज को पूरी तरह अपनाना होता है। यही वजह है कि वह किरदार की मांग के अनुसार खुद को बदलने से कभी नहीं हिचकतीं।''

ऋचा चड्ढा ने अपने करियर की शुरुआत फिल्म 'ओए लकी! लकी ओए!' से की थी, जिसमें उन्होंने छोटा, लेकिन यादगार रोल निभाया। इसके बाद 2012 में आई फिल्म 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' ने उन्हें अलग पहचान दिलाई। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

'गोलियों की रासलीला राम-लीला', 'मसान', 'फुकरे', 'सेक्शन 375' जैसी फिल्मों में उन्होंने हर बार खुद को नए रूप में पेश किया। इसके अलावा, वेब सीरीज 'इनसाइड एज' में भी उनका काम काफी सराहा गया। हर प्रोजेक्ट के साथ ऋचा ने चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं को बड़ी ही खूबसूरती के साथ पेश किया है।

ऋचा आखिरी बार संजय लीला भंसाली की वेब सीरीज 'हीरामंडी: द डायमंड बाजार' में नजर आई थीं। यह सीरीज लाहौर के मशहूर रेड-लाइट एरिया हीरा मंडी की पृष्ठभूमि पर आधारित थी और आजादी से पहले के दौर में तवायफों की जिंदगी, उनके संघर्ष और राजनीति से उनके रिश्ते को दिखाती है।

--आईएएनएस

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