नई दिल्ली, 7 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा 44 महीने बाद नीतिगत ब्याज दर में बढ़ोतरी और मौद्रिक नीति के रुख को चरणबद्ध सख्ती की ओर ले जाने का फैसला वैश्विक तनाव के बीच उम्मीद के अनुरूप है। हालांकि, आगे की मौद्रिक सख्ती के फैसले डेटा के आधार पर होने चाहिए। यह जानकारी पीएचडीसीसीआई ने बुधवार को दी।
पीएचडीसीसीआई के बयान में विशेषज्ञों के हवाले से कहा गया कि उत्पादक क्षेत्रों के लिए पर्याप्त ऋण प्रवाह सुनिश्चित करते हुए मौद्रिक सख्ती को आर्थिक आंकड़ों पर आधारित रखा जाना चाहिए।
पीएचडीसीसीआई के अध्यक्ष राजीव जुनेजा ने कहा, “44 महीने बाद नीतिगत दर में बढ़ोतरी वैश्विक परिस्थितियों और दुनिया भर के प्रमुख केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने के फैसलों को देखते हुए उद्योग की उम्मीदों के अनुरूप है।”
पीएचडीसीसीआई के सीईओ एवं महासचिव डॉ. रणजीत मेहता ने कहा, “वैश्विक ऊर्जा कीमतों, भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और घरेलू खाद्य कीमतों पर दबाव के बीच मौद्रिक नीति के रुख को चरणबद्ध सख्ती की ओर ले जाने से महंगाई के रुझान को लेकर अनिश्चितता बढ़ रही है।”
मेहता ने कहा कि अब प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना होनी चाहिए कि “मौद्रिक सख्ती आर्थिक आंकड़ों पर आधारित रहे और साथ ही उत्पादक क्षेत्रों के लिए पर्याप्त ऋण प्रवाह बना रहे।”
उन्होंने कहा कि महंगाई पर काबू पाने के लिए मौद्रिक नीति के साथ-साथ आपूर्ति क्षमता, लॉजिस्टिक्स, खाद्य प्रबंधन और ऊर्जा सुरक्षा में तेज सुधार महत्वपूर्ण होगा।
बयान में कहा गया कि देश की आर्थिक वृद्धि मजबूत बनी हुई है। इसे मुख्य रूप से निजी खपत, मजबूत निवेश गतिविधियों, लचीले निर्यात, अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों की मजबूत प्रणालीगत स्थिति तथा औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) और विनिर्माण एवं सेवा पीएमआई जैसे उच्च आवृत्ति वाले आर्थिक संकेतकों की मजबूत गति से समर्थन मिल रहा है।
बयान के अनुसार, आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने वैश्विक अनिश्चितताओं में अचानक बढ़ोतरी, वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों और वित्तीय बाजारों में अस्थिरता के बीच नीतिगत रेपो दर में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी करने का फैसला किया। इसके बाद रेपो दर 5.5 प्रतिशत हो गई है। यह फैसला ऐसे समय हुआ है जब वैश्विक आर्थिक वृद्धि मजबूत होने के बावजूद उसमें गिरावट का रुझान बना हुआ है।
स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (एसडीएफ) दर 5.25 प्रतिशत पर बनी हुई है, जबकि मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (एमएसएफ) और बैंक रेट 5.75 प्रतिशत पर हैं। साथ ही, आरबीआई ने मौद्रिक नीति के रुख को ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘चरणबद्ध सख्ती’ कर दिया है।
—आईएएनएस
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