आरबीआई ने बैंकिंग सिस्टम में तरलता बढ़ाने के लिए डाले 1.41 लाख करोड़ रुपये

आरबीआई ने बैंकिंग सिस्टम में तरलता बढ़ाने के लिए डाले 1.41 लाख करोड़ रुपये

मुंबई, 23 जून (आईएएनएस)। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मंगलवार को सात दिन की वेरिएबल रेट रेपो (वीआरआर) नीलामी के जरिए बैंकिंग सिस्टम में अस्थायी तरलता बढ़ाने के लिए 1.41 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा डाले।

आरबीआई की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, सिस्टम में फंड 5.26 प्रतिशत की कट-ऑफ दर और वेटेड एवरेज दर पर डाले गए।

यह कदम तब उठाया गया जब बैंकिंग सिस्टम में तरलता, 21 जून को 30,685.11 करोड़ रुपये के अधिशेष से घटकर 22 जून को 19,971.89 करोड़ रुपये के घाटे में बदल गई।

जानकारों का कहना है कि गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) भुगतान के कारण बैंकों से पैसे बाहर जाने से सिस्टम में तरलता कम हो गई।

तरलता में कमी की वजह से ओवरनाइट मनी मार्केट रेट्स पर दबाव बढ़ गया है। वेटेड एवरेज कॉल मनी रेट 5.43 प्रतिशत पर ट्रेड कर रहा है, जो आरबीआई के रेपो रेट से 0.18 प्रतिशत अधिक है।

अगर जीएसटी के भुगतान जैसे कारणों से बैंकिंग लिक्विडिटी बहुत ज्यादा कम हो जाती है, तो शॉर्ट-टर्म मनी मार्केट रेट्स (जैसे वेटेड एवरेज कॉल मनी रेट) आरबीआई के स्टैंडर्ड रेपो रेट से ऊपर जा सकते हैं।

तरलता डालकर आरबीआई यह पक्का करता है कि शॉर्ट-टर्म फंडिंग का दबाव कम हो और बिना किसी आर्थिक मंदी के फाइनेंशियल सिस्टम में क्रेडिट का फ्लो आसानी से चलता रहे।

आरबीआई टैक्स पेमेंट, एडवांस टैक्स पेमेंट या मौसम के हिसाब से क्रेडिट की मांग की वजह से होने वाली शॉर्ट-टर्म कमी को मैनेज करने के लिए बैंकिंग सिस्टम में समय-समय पर कुछ समय के लिए और लंबे समय के लिए लिक्विडिटी डालता रहता है। केंद्रीय बैंक यह काम अलग-अलग मॉनेटरी टूल्स और मार्केट ऑपरेशन्स के जरिए करता है।

आरबीआई बैंकिंग सिस्टम में काफी मात्रा में कुछ समय के लिए लिक्विडिटी डालने के लिए अकसर वीआआर नीलामी करता है, जिसमें 3-दिन या 7-दिन की अवधि शामिल होती है।

जब लिक्विडिटी कम हो जाती है, तो बैंक आरबीआई से सीधे फंड उधार लेने के लिए सही सरकारी सिक्योरिटीज गिरवी रखते हैं, जिससे उन्हें तुरंत राहत मिलती है।

सिस्टम में लंबे समय के लिए लिक्विडिटी डालने के लिए, आरबीआई सेकेंडरी मार्केट से सरकारी सिक्योरिटीज खरीदता है। इससे बैंकिंग सिस्टम में हमेशा के लिए कैश आ जाता है, जिससे बैंक आसानी से अपनी कैश रिजर्व रेश्यो (सीआरआर) की जरूरतों को पूरा कर पाते हैं।

--आईएएनएस

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