'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य के लिए गुणवत्ता बने विकास का मूलमंत्र: पीयूष गोयल

'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य के लिए गुणवत्ता बने विकास का मूलमंत्र: पीयूष गोयल

नई दिल्ली, 23 फरवरी (आईएएनएस)। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा कि अगर भारत को अपने दीर्घकालिक आर्थिक लक्ष्यों को हासिल करना है, तो गुणवत्ता को विनिर्माण और निर्यात व्यवस्था का मुख्य आधार बनाना होगा।

उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) और क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (क्यूसीआई) द्वारा आयोजित पहले राष्ट्रीय गुणवत्ता सम्मेलन को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 'जीरो डिफेक्ट, जीरो इफेक्ट' का विजन अमृत काल में भारत की विकास यात्रा का मार्गदर्शन करना चाहिए और 'विकसित भारत 2047' के सपने को साकार करने में मदद करनी चाहिए।

उन्होंने कहा, "भारत केवल उपभोक्ता देश बनकर आगे नहीं बढ़ सकता। देश को उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों और सेवाओं का वैश्विक निर्माता बनना होगा। 'ब्रांड इंडिया' विश्वसनीयता, भरोसे और उत्कृष्टता का प्रतीक बनना चाहिए।"

मंत्री ने कहा कि अगले छह से सात वर्षों में 2 ट्रिलियन डॉलर के निर्यात लक्ष्य, जिसमें 1 ट्रिलियन डॉलर वस्तुओं का और 1 ट्रिलियन डॉलर सेवाओं का निर्यात शामिल है, को हासिल करने के लिए भारतीय उत्पादों को वैश्विक मानकों पर खरा उतरना होगा।

गोयल ने बताया कि पिछले तीन से साढ़े तीन वर्षों में भारत ने 38 विकसित देशों के साथ नौ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) किए हैं, जो वैश्विक जीडीपी और व्यापार के लगभग दो-तिहाई हिस्से को कवर करते हैं।

उन्होंने कहा कि इन समझौतों से वस्त्र, चमड़ा, फुटवियर और दवा उद्योग जैसे क्षेत्रों में नए अवसर खुलते हैं, लेकिन इन बाजारों का पूरा लाभ उठाने के लिए भारतीय कंपनियों को लगातार उच्च गुणवत्ता बनाए रखनी होगी।

साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि श्रम-प्रधान क्षेत्रों में क्षमता होने के बावजूद वैश्विक व्यापार में भारत की हिस्सेदारी अभी भी सीमित है।

गोयल ने उद्योग जगत से अपील की कि वे बेहतर बाजार पहुंच का लाभ उठाएं और यह सुनिश्चित करें कि भारत में बिकने वाले उत्पादों की गुणवत्ता निर्यात किए जाने वाले उत्पादों के समान हो।

उन्होंने कहा कि पहले ऐसा समय था जब उपभोक्ता 'एक्सपोर्ट क्वालिटी' उत्पाद मांगते थे। अब देश को दोहरी गुणवत्ता प्रणाली खत्म कर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए समान मानक अपनाने होंगे।

--आईएएनएस

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