नए यूपीआई एमडीआर से तीन-चौथाई से ज्यादा व्यापारियों पर नहीं पड़ेगा असर : एनपीसीआई चीफ दिलीप अस्बे

नए यूपीआई एमडीआर से तीन-चौथाई से ज्यादा व्यापारियों पर नहीं पड़ेगा असर : एनपीसीआई चीफ दिलीप असबे

मुंबई, 24 सितंबर (आईएएनएस)। भारत में डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले करीब तीन-चौथाई व्यापारियों पर 2,000 रुपए से अधिक के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) लेनदेन पर लागू की गई नई मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) नीति का असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि उन्होंने कभी भी 2,000 रुपए से अधिक का कोई लेनदेन दर्ज नहीं किया है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) दिलीप अस्बे ने गुरुवार को यह जानकारी दी।

देश की आर्थिक राजधानी में एसबीआई बैंकिंग एंड इकोनॉमिक कॉन्क्लेव में बोलते हुए अस्बे ने कहा कि भारत में 6 करोड़ से अधिक व्यापारी डिजिटल भुगतान स्वीकार करते हैं और इनमें से करीब 75 प्रतिशत व्यापारियों ने 2,000 रुपए से अधिक का एक भी लेनदेन नहीं किया है। ऐसे में एमडीआर नीति का अधिकांश व्यापारियों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

उन्होंने कहा, “हमारे पास करीब 6 करोड़ यूनिक यूपीआई व्यापारी हैं और इनमें से 75 प्रतिशत ने 2,000 रुपए से अधिक का कोई लेनदेन नहीं किया है। इसलिए अधिकांश व्यापारी एमडीआर से प्रभावित नहीं होंगे।”

उन्होंने बताया कि एमडीआर का अधिकांश बोझ बड़े कारोबारों पर पड़ेगा।

अस्बे के अनुसार, कुल एमडीआर मूल्य का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा उन व्यापारियों से आने की उम्मीद है, जिनका सालाना ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू (जीएमवी) 1,000 करोड़ रुपए से अधिक है। बाकी राशि में से करीब आधा हिस्सा उन कारोबारों से आएगा, जिनका सालाना जीएमवी 1 करोड़ रुपए से अधिक है।

अस्बे ने कहा कि इनमें से ज्यादातर व्यापारी पहले से ही क्रेडिट कार्ड से भुगतान स्वीकार करते हैं और इसी तरह के लेनदेन शुल्क से परिचित हैं। इसलिए उद्योग को उम्मीद नहीं है कि वे इस अतिरिक्त लागत का बोझ ग्राहकों पर डालेंगे।

अस्बे ने कहा, “एमडीआर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बड़े कारोबारों से आने की उम्मीद है, जिनमें से ज्यादातर पहले से ही कार्ड से भुगतान स्वीकार करते हैं और एमडीआर का भुगतान करते हैं।”

हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि व्यापारी मूल्य के करीब 10 प्रतिशत हिस्से वाला एक छोटा वर्ग संभावित रूप से एमडीआर का बोझ ग्राहकों पर डालने की कोशिश कर सकता है।

फिर भी उन्होंने कहा कि बैंक, पेमेंट एग्रीगेटर, अधिग्रहण करने वाले बैंक और एनपीसीआई यह सुनिश्चित करने के लिए काम करेंगे कि इस तरह के शुल्क ग्राहकों से न वसूले जाएं।

अस्बे ने कहा, “किसी ग्राहक से शुल्क लिए जाने का वास्तविक जोखिम कुल मूल्य का सिर्फ 10 प्रतिशत है।”

एनपीसीआई प्रमुख ने यह भी भरोसा जताया कि नए एमडीआर ढांचे से यूपीआई लेनदेन की मात्रा या मूल्य पर कोई महत्वपूर्ण असर नहीं पड़ेगा।

--आईएएनएस

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