ब्राजील का राष्ट्रपति चुनाव: दूसरे दौर में लूला ने हासिल की जीत

Lula wins

ब्रासीलिया, 26 अक्टूबर (आईएएनएस)। ब्राजील के सुपीरियर इलेक्टोरल कोर्ट की ओर से जारी किए गए नतीजों के अनुसार, सत्ताधारी वर्कर्स पार्टी के उम्मीदवार और ब्राजील के मौजूदा राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा ने रविवार को हुए राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे दौर (रनऑफ) में जीत हासिल की है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 99.89 प्रतिशत वोटों की गिनती पूरी होने पर, लूला को कुल वैध वोटों का 51.78 प्रतिशत हिस्सा मिला। वहीं, लिबरल पार्टी से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार और ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे, फ्लेवियो बोल्सोनारो को 48.23 प्रतिशत वोट मिले। पहले दौर में लूला पिछड़ गए थे, लेकिन इसके बाद उन्होंने शानदार वापसी की।

लूला 5 जनवरी 2027 को चार साल के कार्यकाल के लिए राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे। यह चौथी बार होगा जब वे ब्राजील के राष्ट्रपति बनेंगे।

वे पहले दौर में पीछे रह गए थे। उनकी इस जीत ने लैटिन अमेरिका में उस दक्षिणपंथी झुकाव को रोक दिया है, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन हासिल था। लूला 2027 से 2030 तक शासन करेंगे। उनके सामने एक ऐसी कांग्रेस (संसद) होगी, जिसमें बोल्सोनारो की लिबरल पार्टी के पास दशकों में सबसे ज्यादा सीटें हैं।

रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लूला ने लिखा: "एक बार फिर, ब्राजील की जनता ने मुझे दिखाया कि जब हम साथ मिलकर चलते हैं, तो कोई भी सपना बहुत बड़ा नहीं होता। हमने इन दिनों खूब मेहनत की। हर कदम, हर काम और हर मार्च, केवल चुनाव प्रचार के पल नहीं थे। ये सपनों के साक्षात होने का प्रमाण थे, जो ठोस उपलब्धियों में बदल गए—जैसे कि 6x1 कार्यदिवस (सप्ताह में 6 दिन काम) का अंत। लोगों के आगे बढ़े हाथ और उनकी मुस्कान ने मुझे याद दिलाया कि मैंने अपना जीवन इस देश के मजदूरों की लड़ाई के लिए क्यों समर्पित किया है।"

उन्होंने आगे कहा, "हम इस सफर से और अधिक मजबूत, एकजुट और बेहतर भविष्य सुनिश्चित करने के लिए तैयार होकर निकले हैं। ब्राजील गले लगाने, हर आंसू, हर मुस्कान और मेरा हाथ कभी न छोड़ने के लिए आपका धन्यवाद। हमारी कहानी के अभी कई खूबसूरत पन्ने लिखे जाने बाकी हैं।"

4 अक्टूबर को हुए मतदान के पहले दौर में, बोल्सोनारो 47.03 प्रतिशत वैध वोटों के साथ आगे थे, जबकि लूला को 45.16 प्रतिशत वोट मिले थे। इस नतीजे के बाद, लैटिन अमेरिका के सबसे बड़े देश में तीन सप्ताह तक जोरदार चुनाव प्रचार चला।

--आईएएनएस

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