नई दिल्ली, 3 अप्रैल (आईएएनएस)। जापान के विदेशी मंत्रालय ने जापान-इंडिया इकोनॉमिक अफेयर्स डिविजन स्थापित किया है और इसके जरिए जापानी सरकार की कोशिश भारत में निवेश के लिए स्थानीय कंपनियों को मदद करना है।
जापान की ओर से यह कदम दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए उठाया गया है।
जापानी सरकार ने बयान में कहा, "जापान-इंडिया इकोनॉमिक अफेयर्स डिविजन स्थापित करके विदेश मंत्रालय भारत में जापानी कंपनियों के विस्तार और निवेश को बढ़ाएगा और इससे भारत के साथ आर्थिक साझेदारी गहरी होगी।"
बयान में आगे कहा गया, “भारत की उच्च आर्थिक विकास दर को देखते हुए, जापान-भारत संबंधों में आर्थिक सहयोग का महत्व दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है।”
इस नई पहल से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), स्टार्टअप और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे उच्च विकास दर वाले क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जो दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक प्राथमिकताओं के अनुरूप है।
यह पहल बदलती वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं और भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच एक प्रमुख आर्थिक और रणनीतिक साझेदार के रूप में भारत के बढ़ते महत्व को दर्शाती है।
यह कदम 2025 के द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन के दौरान हुए समझौते के अनुसार, भारत में निजी क्षेत्र के निवेश को 2035 तक 10 ट्रिलियन येन (लगभग 62.6 बिलियन डॉलर) तक पहुंचाने के भारत-जापान लक्ष्य का भी पूरक है।
वर्ष 2000 से अब तक भारत में जापान का कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश लगभग 43.2 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है, जिसमें प्रमुख निवेश ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, दूरसंचार, रसायन और वित्तीय सेवाओं जैसे क्षेत्रों में केंद्रित हैं।
सर्वेक्षणों से पता चलता है कि जापानी निर्माता भारत को एक आशाजनक विकास बाजार के रूप में देखते हैं, लेकिन कई लोग अभी भी सतर्क हैं क्योंकि वे देश के नियमों और विनियमों से परिचित नहीं हैं, जो राज्यों के अनुसार भिन्न-भिन्न हैं।
भारत में जापानी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में वृद्धि हो रही है, जो 2023-24 में कुल 3.1 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। पूंजी मुख्य रूप से ऑटोमोबाइल, विद्युत उपकरण, दूरसंचार, रसायन, वित्तीय सेवाओं और फार्मास्यूटिकल्स क्षेत्रों में प्रवाहित हुई है।
भारत में नीमराना और श्री सिटी में समर्पित जापान औद्योगिक टाउनशिप (जेआईटी) कार्यरत हैं, जहां 100 से अधिक जापानी कंपनियां स्थित हैं।
--आईएएनएस
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