नई दिल्ली, 3 जून (आईएएनएस)। एचएसबीसी इंडिया सर्विसेज पीएमआई के बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, माल ढुलाई (फ्रेट), डिजिटल सेवाओं, ई-कॉमर्स, मनोरंजन और आईटी सेवाओं की बढ़ती मांग के कारण नए कारोबार (न्यू बिजनेस) में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई, जिसके चलते भारत के सेवा क्षेत्र (सर्विस सेक्टर) का परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) मई में बढ़कर 59.8 पर पहुंच गया, जो अप्रैल में 58.8 था।
नए ऑर्डर बढ़ने के कारण कंपनियों ने अपनी कारोबारी गतिविधियों को और तेज किया। इसके साथ ही सेवा क्षेत्र की कंपनियों ने कर्मचारियों की संख्या बढ़ाना भी जारी रखा, जिससे रोजगार के अवसरों में वृद्धि देखने को मिली।
पीएमआई रिपोर्ट के अनुसार, भारत के सेवा क्षेत्र में लागत का दबाव अभी भी ऐतिहासिक रूप से ऊंचे स्तर पर बना हुआ है, लेकिन मई में इसमें कमी आई और यह पिछले चार महीनों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया।
इससे कंपनियों को अपनी सेवाओं की कीमतों में केवल सीमित बढ़ोतरी करने की जरूरत पड़ी। मई में कीमतों में बढ़ोतरी की रफ्तार जनवरी के बाद सबसे धीमी रही।
एचएसबीसी की चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट प्रांजुल भंडारी ने कहा कि मई में भारत के सेवा क्षेत्र में कारोबारी गतिविधियों का विस्तार जारी रहा, जिसे नए कारोबार में लगातार बढ़ोतरी का समर्थन मिला।
उन्होंने बताया कि भारत से प्रदान की जाने वाली सेवाओं की विदेशी मांग (एक्सटर्नल डिमांड) भी तेज हुई। अप्रैल में आई गिरावट के बाद निर्यात आधारित सेवाओं की मांग में अच्छी रिकवरी देखने को मिली।
भंडारी ने कहा कि इनपुट लागत में महंगाई कम होने से कंपनियों पर कीमतें बढ़ाने का दबाव भी घटा है।
वित्त वर्ष की पहली तिमाही के बीच भारतीय सेवा प्रदाताओं को मिलने वाले नए ऑर्डरों में पिछले छह महीनों की सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई। इससे मार्च में दिखाई दी सुस्ती और पीछे छूट गई।
भारतीय सेवा कंपनियों को विदेशी बाजारों से भी अधिक ऑर्डर मिले। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय ऑर्डरों की वृद्धि कुल बिक्री की तुलना में थोड़ी कम रही और 2025 के औसत स्तर से भी नीचे रही।
फिर भी विदेशी मांग मजबूत बनी रही। कंपनियों ने बताया कि उन्हें ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, हांगकांग, मलेशिया, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और यूनाइटेड किंगडम (यूके) से अधिक कारोबार मिला।
रिपोर्ट में कहा गया है कि सेवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद भारतीय सेवाओं की मांग मजबूत बनी रही। हालांकि, शुल्क वृद्धि की दर चार महीने के निचले स्तर पर आ गई और यह अपने दीर्घकालिक औसत के करीब रही।
भारतीय सेवा क्षेत्र की कंपनियों ने मई में कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने का सिलसिला जारी रखा। रोजगार सृजन की गति मजबूत रही और पिछले लगभग एक वर्ष में यह दूसरी सबसे तेज वृद्धि रही। इससे बेहतर प्रदर्शन केवल अप्रैल में दर्ज किया गया था।
हालांकि, सर्वे में शामिल 7 प्रतिशत से भी कम कंपनियों ने नए कर्मचारियों की भर्ती बढ़ाने की बात कही, जबकि अधिकांश कंपनियों ने अपने कर्मचारियों की संख्या में कोई बदलाव नहीं किया।
--आईएएनएस
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