नई दिल्ली, 28 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री की औसत एसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) वित्त वर्ष 27 की दूसरी तिमाही में तिमाही आधार पर 4.9 प्रतिशत और सालाना आधार पर 14.1 प्रतिशत बढ़कर 89.51 लाख करोड़ रुपए हो गई है। यह जानकारी बुधवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।
आईसीआरए एनालिटिक्स की ओर रिपोर्ट में बताया गया कि हालांकि, बाजारों में गिरावट के चलते अगस्त 2026 में इंडस्ट्री एयूएम 87.08 लाख करोड़ रुपए और सितंबर 2026 में 82.64 लाख करोड़ रुपए था।
मासिक गिरावट के बावजूद, सितंबर में एयूएम पिछले साल की तुलना में 9.3 प्रतिशत अधिक रहा। यह इस सेक्टर की लंबी अवधि की विकास दर को दर्शाता है, जो खुदरा निवेशकों की बढ़ती भागीदारी और सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) में लगातार आ रहे निवेश (इनफ्लो) से प्रेरित है।
वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में नेट इनफ्लो 1.44 लाख करोड़ रुपए के साथ सकारात्मक रहा, हालांकि यह पिछली तिमाही के 2.05 लाख करोड़ रुपए से कम था। इसमें आई कमी का मुख्य कारण डेट-ओरिएंटेड स्कीमों से फंड की निकासी (आउटफ्लो) और सितंबर 2026 में हुई बड़ी निकासी थी।
इक्विटी-ओरिएंटेड स्कीमें विकास का मुख्य आधार बनी रहीं, जिनमें तिमाही के दौरान 92,293 करोड़ रुपए का नेट इनफ्लो आया, जबकि हाइब्रिड स्कीमों में इनफ्लो की गति धीमी रही। डेट-ओरिएंटेड स्कीमों से 5,853 करोड़ रुपए का नेट आउटफ्लो देखा गया, जो बाजार की बदलती स्थितियों के बीच निवेशकों की इक्विटी-लिंक्ड उत्पादों में रुचि को दर्शाता है।
रिपोर्ट में कहा गया, "निवेशक आधार में लगातार विस्तार और इक्विटी में मजबूत इनफ्लो, बाजार में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग के लिए एक सकारात्मक और मजबूत विकास दृष्टिकोण की पुष्टि करते हैं।"
निवेशकों की भागीदारी काफी मजबूत रही; सितंबर 2026 में कुल म्यूचुअल फंड फोलियो की संख्या बढ़कर 28.62 करोड़ हो गई, जबकि सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के जरिए निवेश 32,490 करोड़ रुपए के अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।
सितंबर 2026 में नए एसआईपी खातों की संख्या में 63.26 लाख की वृद्धि हुई। रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही और वित्त वर्ष 27 की दूसरी तिमाही के बीच शीर्ष दस एसेट मैनेजमेंट कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी काफी हद तक स्थिर रही।
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