भारत-अमेरिका ट्रेड डील से पैदा होंगे रोजगार के अधिक अवसर, फॉरेक्स भी बढ़ेगा : एनएसई सीईओ

भारत-अमेरिका ट्रेड डील से पैदा होंगे रोजगार के अधिक अवसर, फॉरेक्स भी बढ़ेगा : एनएसई सीईओ

नई दिल्ली, 3 फरवरी (आईएएनएस)। भारत-अमेरिका ट्रेड डील देश के लिए काफी महत्वपूर्ण समझौता है और इससे देश में रोजगार के अवसर पैदा होंगे। साथ ही, विदेशी मुंद्रा भंडार (फॉरेक्स) भी बढ़ेगा। यह जानकारी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के सीईओ और एमडी आशीष कुमार चौहान ने मंगलवार को दी।

समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए चौहान ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील की काफी समय से उम्मीद की जा रही थी। यह भारत-ईयू ट्रेड डील की तरह नहीं है, जो कि छह महीने बाद लागू होगी। यह तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है।

चौहान ने आगे कहा, "भारत एकमात्र ऐसा देश है जिसके पास मानव संसाधन, उच्च तकनीक की समझ और प्रौद्योगिकी को अपनाने की क्षमता है। यही कारण है कि सभी देश हमारे साथ बातचीत करने के लिए तैयार हैं। इस डील से भारत का निर्यात बढ़ेगा, रोजगार के अवसर पैदा होंगे और विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि होगी।"

भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी रेसिप्रोकल टैरिफ 25 प्रतिशत से 18 प्रतिशत हो जाने पर एनएसई सीईओ ने कहा कि इससे देश के अधिक श्रम उपयोग वाले सेक्टर जैसे चमड़े का सामान, कपड़ा और समुद्री उत्पाद सेक्टर को फायदा होगा। साथ ही बताया कि अगले 10 वर्ष भारत के लिए स्वर्ण काल (गोल्डन एज) होगा।

चौहान ने कहा कि पोर्टफोलियो निवेशक भी व्यापार समझौते को लेकर सकारात्मक हैं।

उन्होंने कहा, “सभी खासकर निवेशक इस समझौते से बहुत खुश हैं, और इसके कारण कंपनियों के मुनाफे में वृद्धि की संभावना बहुत अधिक है।”

चौहान ने आगे बताया, “भारतीय निवेशकों को देश के विकास पथ के लिए प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण पर पूरा भरोसा है। इसके कारण हर महीने घरेलू निवेशकों की संख्या बढ़ रही है।”

इसके अलावा, चौहान कहा कि पिछले 30-35 वर्षों से अमेरिका और यूरोप के कई देश चीन का समर्थन कर रहे थे, लेकिन अब वे चीन को अपना प्रतिद्वंद्वी मानते हैं और इसलिए उससे दूरी बना रहे हैं।

चौहान ने कहा, “भारत को अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप के देशों जैसे साझेदारों की जरूरत है जो हमसे आयात कर सकें और जिन्हें हम अपनी सेवाएं, कौशल और निर्मित वस्तुएं निर्यात कर सकें। चीन द्वारा हमारे सामान का आयात करने की संभावना कम है। इन देशों के साथ बातचीत करके हम प्रभावी रूप से चीन के लिए प्रतिस्पर्धा पैदा कर रहे हैं।”

--आईएएनएस

एबीएस/