नई दिल्ली, 8 मार्च (आईएएनएस)। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण भारत ने अन्य देशों से अतिरिक्त कच्चा तेल खरीदना शुरू कर दिया है।
सूत्रों के मुताबिक, भारतीय कंपनियां अमेरिका, रूस और पश्चिमी अफ्रीका में मौजूद कच्चे तेल के आपूर्तिकर्ता देशों से कच्चा तेल खरीदने के लिए बातचीत कर रही हैं।
यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका है। यह जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा बाजारों के लिए एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। फरवरी में भारत के कच्चे तेल के आयात का लगभग आधा हिस्सा इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरा था।
भारत अपनी कच्चे तेल की आवश्यकता का लगभग 88 प्रतिशत आयात करता है, इसलिए स्थिर आपूर्ति मार्ग देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
संभावित व्यवधानों से निपटने के लिए, रिफाइनरियों ने नियोजित रखरखाव कार्यों को स्थगित कर दिया है और सामान्य प्रसंस्करण दर बनाए रखी है ताकि निकट भविष्य में मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त ईंधन का उत्पादन किया जा सके।
सूत्रों के अनुसार, "जलडमरूमध्य के बाहर के स्रोत पूरी तरह से चालू हैं और देश संघर्ष रहित क्षेत्रों से अधिक आपूर्ति प्राप्त कर रहा है।"
उन्होंने यह भी बताया कि 2025 में भारत के कच्चे तेल के आयात का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर से आया था।
मध्य पूर्व संघर्ष में वृद्धि के बाद, यह हिस्सा बढ़कर लगभग 70 प्रतिशत हो गया है।
आपूर्ति की स्थिति को अमेरिकी वित्त विभाग द्वारा जारी एक अस्थायी छूट से भी समर्थन मिला है, जो 5 मार्च से पहले जहाजों पर लोड किए गए प्रतिबंधित रूसी कच्चे तेल की बिक्री और डिलीवरी की अनुमति देता है।
यह छूट 5 अप्रैल तक वैध है और पहले से ही ट्रांजिट में मौजूद माल को प्रतिबंधों का उल्लंघन किए बिना वितरित करने की अनुमति देता है।
इस बीच, केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद भारत की ऊर्जा आपूर्ति की स्थिति स्थिर बनी हुई है।
पत्रकारों से बात करते हुए पुरी ने कहा कि देश मौजूदा वैश्विक परिवेश में ऊर्जा की उपलब्धता, सामर्थ्य और स्थिरता सुनिश्चित करने की चुनौती का सफलतापूर्वक सामना कर रहा है।
उन्होंने कहा, “होर्मुज मार्ग के अलावा सभी मार्गों से देश में ऊर्जा आयात पूरी तरह से जारी है। हमारे नागरिकों की ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ण पूर्ति हो रही है। भारत एक मजबूत स्थिति में है और चिंता या अटकलों की कोई गुंजाइश नहीं है।”
--आईएएनएस
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