नई दिल्ली, 3 अक्टूबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी.के. मिश्रा ने शनिवार को कहा कि मजबूत व्यापक आर्थिक बुनियादी ढांचे के कारण भारत वैश्विक अनिश्चितता के बीच तेज विकास दर बनाए रखने में कामयाब रहा है।
‘5वें कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव’ के साइडलाइन में मीडिया से बातचीत में मिश्रा ने कहा कि वैश्विक घटनाक्रमों के कारण अनिश्चितता बनी हुई है, लेकिन भारत ने विकास की ऊंची दर बरकरार रखी है और अपने व्यापक आर्थिक बुनियादी ढांचे को भी मजबूत बनाए रखा है।”
प्रधान सचिव के अनुसार, भारत की मुख्य ताकत उसका मजबूत व्यापक आर्थिक बुनियादी ढांचा है।
उन्होंने कहा, “हम अपनी सप्लाई चेन में विविधता लाने में सक्षम रहे हैं। हमने व्यापक व्यापार संबंध भी बनाए हैं, अधिक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) किए हैं और अधिक व्यापारिक संबंध स्थापित किए हैं। साथ ही, हम अपनी विनिर्माण क्षमता बढ़ाने की भी कोशिश कर रहे हैं। इस लिहाज से हम खुले रहना चाहते हैं, लेकिन साथ ही कम संवेदनशील भी रहना चाहते हैं। हम दुनिया के लिए खुले रहते हुए अपनी कमजोरियों से बचना चाहते हैं।”
शीर्ष अधिकारी ने कहा कि आर्थिक फैसले पूरी तरह यह जाने बिना लिए जाते हैं कि उनके परिणाम क्या होंगे। इसमें हमेशा जोखिम का एक तत्व मौजूद रहता है।
उन्होंने कहा कि दुनिया के सामने अब केवल जोखिम ही नहीं, बल्कि अनिश्चितता भी बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि जोखिम लेने और अनिश्चितता के बीच अंतर अब स्पष्ट रूप से सामने आ गया है।
होर्मुज स्ट्रेट संकट का जिक्र करते हुए मिश्रा ने कहा कि महत्वपूर्ण मार्ग संवेदनशीलता के स्रोत बन जाते हैं और कभी-कभी टैरिफ का इस्तेमाल हथियार के रूप में किया जाने लगता है।
उन्होंने कहा कि ऊर्जा परिवर्तन को भी अन्य चीजों के साथ फिर से नए सिरे से मूल्यांकित किया जा रहा है। अन्य प्रतिबंधों का इस्तेमाल भी रणनीतिक उद्देश्यों के लिए तेजी से किया जा रहा है।
उन्होंने कहा, “सवाल यह नहीं है कि वैश्वीकरण खत्म हो गया है या नहीं, बल्कि यह है कि अर्थव्यवस्थाओं को झटकों और अत्यधिक निर्भरता के प्रति कम संवेदनशील बनाते हुए वैश्वीकरण के लाभों को कैसे बरकरार रखा जाए?”
उन्होंने कहा, “भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र इसका एक अच्छा उदाहरण है। फार्मा और सेमीकंडक्टर क्षेत्रों में भी यही देखने को मिल रहा है।”
--आईएएनएस
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