भारत के ई-रिटेल सेक्टर का आकार करीब 65 अरब डॉलर हुआ, 2030 तक सालाना 20 प्रतिशत वृद्धि की उम्मीद

भारत के ई-रिटेल सेक्टर का आकार करीब 65 अरब डॉलर हुआ, 2030 तक सालाना 20 प्रतिशत वृद्धि की उम्मीद

नई दिल्ली, 9 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत के ऑनलाइन रिटेल मार्केट का ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू (जीएमवी) 2025 में बढ़कर 65-66 अरब डॉलर पर पहुंच गया है और यह सालाना आधार पर करीब 20 प्रतिशत की वृद्धि दर के साथ 2030 तक 170-180 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। यह जानकारी गुरुवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।

बेन एंड कंपनी और फ्लिपकार्ट की रिपोर्ट के अनुसार, ई-रिटेल के जीएमवी में मूल्य के हिसाब से 2025 में 19-21 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि बेहतर आर्थिक परिस्थितियों और उपभोक्ता भावना के कारण पूरे वर्ष तेजी बनी रही।

2025 में निजी उपभोग में 10.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिसका मुख्य कारण जीएसटी में कटौती, आयकर में राहत, मुद्रास्फीति में कमी और ब्याज दरों में गिरावट थी।

इस गति के चलते दूसरी छमाही में 22-24 प्रतिशत और 2026 की पहली तिमाही में अनुमानित 23-25 ​​प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो उपभोग और विवेकाधीन खर्च में रिकवरी को दर्शाती है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि क्विक-कॉमर्स (30 मिनट से कम समय में डिलीवरी) पिछले दो वर्षों में सालाना दोगुनी हो गई है, जो 2025 में 10-11 अरब डॉलर के जीएमवी तक पहुंच गया है और 2030 तक इसके 65-70 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।

हालांकि, 2030 तक ई-रिटेल बाजार में पारंपरिक ई-रिटेल की हिस्सेदारी 60-65 प्रतिशत के साथ बनी रहेगी।

भारत एक महत्वपूर्ण वैश्विक उपभोग केंद्र के रूप में उभर रहा है, जो अगले पांच वर्षों में होने वाले उपभोग में वृद्धि के प्रत्येक 8 डॉलर में से 1 डॉलर का योगदान देने के लिए तैयार है।

विक्रेता पारिस्थितिकी तंत्र के तेजी से विस्तार और भौगोलिक पहुंच में वृद्धि के कारण पिछले पांच वर्षों में खरीदारों की संख्या दोगुनी से अधिक होकर 2025 तक 290-300 मिलियन हो गई है।

जेन जेड ने ई-रिटेल खरीदारों में 40-45 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व किया और 2025 में ई-रिटेल ऑर्डर में लगभग आधा योगदान दिया, मेट्रो शहरों में प्रति खरीदार खर्च अन्य समूहों की तुलना में 2.5 गुना तेजी से बढ़ा।

बेन एंड कंपनी के पार्टनर मनन भासिन ने कहा,"क्विक कॉमर्स में खरीदारी का व्यवहार अलग होता है और चेकआउट की गति तेज होती है और कन्वर्जन भी अधिक होता है। खरीदारी सत्र पांच मिनट से भी कम समय तक चलता है, जो पारंपरिक ई-कॉमर्स का आधा है।"

--आईएएनएस

एबीएस/