अकरा, 7 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारत और घाना ने बुधवार को बायोडायवर्सिटी (जैव विविधता), कृषि अनुसंधान और प्रशिक्षण पर समझौतों पर हस्ताक्षर किए। साथ ही, दोनों देशों ने फार्मास्यूटिकल्स, स्वास्थ्य, रक्षा, खनन, रेलवे और डिजिटल सेक्टर में और सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा की।
अकरा में घाना के विदेश मंत्री सैमुअल ओकुद्जेटो अबलाकवा के साथ बात करते हुए, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने घाना के राष्ट्रपति जॉन ड्रामानी महामा के साथ अपनी मुलाकात का जिक्र किया और दोनों देशों के रिश्तों को बेहतर बनाने में उनके योगदान के लिए उनका आभार जताया।
विदेश मंत्री ने कहा, "यहां आने का मेरा मुख्य मकसद, जाहिर है, पिछले साल प्रधानमंत्री मोदी की ऐतिहासिक यात्रा के बाद की गतिविधियों को आगे बढ़ाना था। और मैं सचमुच बहुत प्रभावित हूं कि हमने इस यात्रा की शुरुआत राष्ट्रपति महामा के मार्गदर्शन से की। हमारे रिश्तों के लिए क्या महत्वाकांक्षाएं और लक्ष्य होने चाहिए, इस बारे में वे बहुत सहृदयी, उदार और खुले विचारों वाले रहे। इसके लिए मैं उन्हें बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं। हम जो करने की कोशिश कर रहे हैं, वह यह है कि अब जब हमने एक व्यापक साझेदारी कायम कर ली है, तो हमें उस पर खरा उतरना होगा। हमें सहयोग के नए क्षेत्र खोजने होंगे। हमें अपनी पुरानी साझेदारी को और मजबूत करना होगा, और आज हमारी चर्चा इसी बारे में हुई है।"
इस बात पर जोर देते हुए कि भारत और घाना "ऐतिहासिक साझेदार" और "ग्लोबल साउथ के चैंपियन" रहे हैं, विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, "जब हम भारतीय नजरिए से घाना को देखते हैं, तो हमारे लिए आप ऐतिहासिक साझेदार रहे हैं। 'ग्लोबल साउथ' शब्द के बनने से पहले ही हम दोनों इसके चैंपियन रहे हैं। और मुझे लगता है कि हमने दुनिया में, मुश्किल हालात में, उन देशों की आजादी, आत्मनिर्भरता और सम्मान के लिए आवाज उठाई है जो पहले उपनिवेश रहे थे। और मुझे लगता है कि वह नींव, वह विरासत हमारे बहुत काम आती है। आज हमारी बातचीत का मुख्य फोकस हमारे रिश्तों के द्विपक्षीय पहलू पर था, और इस बात पर चर्चा हुई कि हम इसे अगले स्तर पर कैसे ले जाएं।"
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि राष्ट्रपति महामा और सैमुअल ओकुद्जेटो अबलाकवा के साथ बातचीत के दौरान, उन्होंने दोनों देशों में शुरू की गई पहलों के बीच समानता का जिक्र किया, जैसे घाना में स्वास्थ्य से जुड़ी पहल और भारत की आयुष्मान भारत पहल।
'फीड घाना' (जो खाद्य सुरक्षा पर केंद्रित है) और किसानों की समृद्धि व मोटे अनाज (मिलेट्स) को बढ़ावा देने के लिए भारत द्वारा शुरू किए गए कार्यक्रम; साथ ही घाना का दस लाख कोडर तैयार करने का लक्ष्य और भारत का 'डिजिटल इंडिया' व 'स्टार्ट-अप प्रोग्राम'—इन सभी पर चर्चा हुई।
उन्होंने आगे कहा, "इन समानताओं और मिलती-जुलती बातों को देखते हुए, मुझे लगता है कि 'ग्लोबल साउथ' के देशों के तौर पर हमारे लिए अपने अनुभव साझा करना और यह देखना बहुत स्वाभाविक है कि हम एक-दूसरे का समर्थन कैसे कर सकते हैं। और मंत्री जी ने जिन कई उदाहरणों का जिक्र किया, वे भी इसी बातचीत से निकले थे। निश्चित रूप से, आज हमने कृषि अनुसंधान और प्रशिक्षण तथा जैव-विविधता पर जो दो समझौते किए हैं, उनके अलावा हम फार्मास्यूटिकल्स (दवा उद्योग) और स्वास्थ्य, खनन, रक्षा, रेलवे और डिजिटल क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं।"
विदेश मंत्री जयशंकर ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने में भारतीय समुदाय की भूमिका की सराहना की और उन्हें भारत और घाना के बीच एक "जीवंत सेतु" बताया। उन्होंने कहा कि भारत और घाना के बीच साझेदारी बढ़ाने, समावेशिता को बढ़ावा देने और यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा, "मुझे यह देखकर भी बहुत खुशी हो रही है कि भारतीय व्यवसाय इस देश में बहुत सक्रिय रहा है। यहां हमारा एक पुराना और बहुत जीवंत भारतीय समुदाय है, और मुझे लगता है कि उस समुदाय का व्यावसायिक वर्ग हमारे बीच वास्तव में एक जीवंत सेतु रहा है। मुझे पता है कि हाल के महीनों में फार्मास्यूटिकल और मेडिकल क्षेत्र, पोल्ट्री क्षेत्र और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश के कुछ बड़े वादे किए गए हैं। इसलिए आज हमें पूरा विश्वास है कि हमारी साझेदारी सुदृढ़ करने, समावेशिता को बढ़ावा देने और यह सुनिश्चित करने में मदद करेगी कि विकास का लाभ वास्तव में हमारे लोगों तक पहुंचे— खासकर ऐसी दुनिया में जो बहुत उथल-पुथल भरी और जटिल है।"
--आईएएनएस
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