बेंगलुरु, 13 जनवरी (आईएएनएस)। भारत में साल 2025 के दौरान एआई से जुड़ी नौकरियां तेजी से बढ़ीं। पिछले साल देश में एआई से जुड़े 2,90,256 पदों की भर्ती की गई। इससे साफ है कि एआई अब सर्विस सेक्टर की सबसे बड़ी ताकत बन चुका है। यह जानकारी मंगलवार को जारी फाउंडइट जॉब सर्च (पूर्व में मॉन्स्टर) की रिपोर्ट में सामने आई है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि साल 2026 में एआई से जुड़ी भर्तियां और तेज होंगी। अनुमान है कि अगले साल एआई (आरटीआई) के जरिए होने वाली भर्तियों में साल-दर-साल 32 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी और यह संख्या करीब 3.80 लाख पदों तक पहुंच सकती है।
भारत का रोजगार बाजार साल 2025 के अंत तक फिर से मजबूत होता दिखा। अलग-अलग क्षेत्रों, कामों और शहरों में लगातार भर्तियां हुईं। भर्तियों में महीने-दर-महीने 5 प्रतिशत और सालाना आधार पर 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
फाउंडइट के चीफ प्रोडक्ट और टेक्नोलॉजी ऑफिसर तरुण शर्मा ने कहा कि साल 2025 में भर्तियों में विस्तार भी हुआ और समझदारी भी दिखी। उन्होंने बताया कि एआई अब कोई प्रयोग नहीं रहा, बल्कि कर्मचारियों की योजना का अहम हिस्सा बन चुका है। आने वाले समय में नौकरी देने वाली कंपनियां कौशल पर आधारित, अनुभवी लोगों को ज्यादा प्राथमिकता देंगी।
रिपोर्ट के अनुसार, आईटी-सॉफ्टवेयर और सर्विसेज में सबसे ज्यादा एआई से जुड़ी नौकरियां रहीं, जिनकी हिस्सेदारी 37 प्रतिशत थी। इसके बाद बैंकिंग और बीएफएसआई क्षेत्र (15.8 प्रतिशत) और मैन्युफैक्चरिंग (6 प्रतिशत) का स्थान रहा।
रिपोर्ट के अनुसार, बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र में एआई नौकरियों में 41 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी हुई। वहीं स्वास्थ्य सेवा और फार्मास्यूटिकल्स (38 प्रतिशत), रिटेल (31 प्रतिशत), लॉजिस्टिक्स (30 प्रतिशत) और टेलीकॉम (29 प्रतिशत) जैसे क्षेत्रों में भी अच्छी बढ़त देखी गई।
रिपोर्ट में बताया गया कि जनरेटिव एआई और लार्ज लैंग्वेज मॉडल (एलएलएम) से जुड़े कौशल में सबसे तेज बढ़ोतरी देखी गई, जिसकी मांग में साल-दर-साल 60 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिसका कारण चैटबॉट, स्मार्ट सहायक और कंपनियों में एआई का बढ़ता इस्तेमाल रहा।
एआई नौकरियों के मामले में बेंगलुरु सबसे आगे रहा, जहां कुल नौकरियों का 26 प्रतिशत हिस्सा रहा। हैदराबाद ने टियर 1 में सबसे तेज वृद्धि दर्ज की। तो वहीं जयपुर, इंदौर और मैसूर जैसे छोटे शहरों में भी एआई नौकरियों में अच्छी बढ़त देखने को मिली।
रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025 में कंपनियों ने मध्यम और अनुभवी स्तर के कर्मचारियों को ज्यादा नौकरी दी। इसका मतलब है कि कंपनियां ऐसे लोगों को चाहती हैं, जिनके पास काम का अच्छा अनुभव हो।
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