गांधीनगर, 13 मार्च (आईएएनएस)। गुजरात सरकार ने सूरत जिले में टेस्टिंग के दौरान एक नए बने ओवरहेड पानी के टैंक के ढह जाने के बाद, निर्माण एजेंसी से 1.04 करोड़ रुपए वसूल किए हैं। जल संसाधन और आपूर्ति मंत्री ईश्वरसिंह पटेल ने शुक्रवार को राज्य विधानसभा को यह जानकारी दी।
एक विधायक द्वारा पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए पटेल ने कहा कि यह टैंक ताड़केश्वर गांव में हरियाल सब-हेडवर्क्स पर बनाया गया था और टेस्टिंग के दौरान ढह गया।
नौ लाख लीटर की स्टोरेज क्षमता वाले इस टैंक के लिए 94.84 लाख रुपए मंजूर किए गए थे, जिसमें से 83.45 लाख रुपए एजेंसी को दिए जा चुके थे।
इस घटना के बाद, सरकार ने ठेकेदार से 1.04 करोड़ रुपए वसूल किए और निर्माण के लिए जिम्मेदार फर्म के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
मंत्री ने सदन को बताया कि इस घटना के लिए जिम्मेदार पाए गए अधिकारियों और अन्य लोगों को ड्यूटी से सस्पेंड कर दिया गया है और वे फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
पटेल ने कहा, "पानी का टैंक ढहने की घटना के लिए जिम्मेदार पाए गए सभी लोगों को ड्यूटी से सस्पेंड कर दिया गया है। इस मामले में जिम्मेदार अधिकारी और आरोपी फिलहाल जेल हिरासत में हैं।"
उन्होंने आगे कहा कि उसी एजेंसी द्वारा किए गए अन्य कामों का निरीक्षण प्रोजेक्ट साइट्स पर सख्ती से किया जा रहा है।
पटेल ने कहा, "इस मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा।"
यह हादसा जनवरी में एक ट्रायल रन के दौरान हुआ था, जब नए बने टैंक की मजबूती जांचने के लिए उसमें पानी भरा जा रहा था।
'गायपगला ग्रुप जल आपूर्ति योजना' के तहत बनाया गया 15 मीटर ऊंचा यह ढांचा, जिसका मकसद इलाके के कई गांवों को पीने का पानी पहुंचाना था, टेस्टिंग के दौरान अचानक ढह गया, जिससे पास में काम कर रहे तीन मजदूर घायल हो गए।
पटेल ने विधानसभा को यह भी बताया कि उसी जगह पर एक नया पानी का टैंक बनाया जाएगा ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि इलाके के लोगों को पानी की आपूर्ति लगातार मिलती रहे।
राज्य में जल इंफ्रास्ट्रक्चर के बारे में और ज्यादा जानकारी देते हुए मंत्री ने कहा कि पिछले 25 सालों में पूरे गुजरात में 20,000 से ज्यादा पानी के टैंक बनाए गए हैं ताकि साफ पीने के पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले नागरिकों के लिए।
उन्होंने कहा, "सूरत जिले में 34 गांवों को पानी की आपूर्ति करने के लिए इस योजना के तहत 24 करोड़ रुपये से ज्यादा मंजूर किए गए हैं।"
इस प्रोजेक्ट का मकसद जिले के ग्रामीण इलाकों में पीने के पानी की उपलब्धता को मजबूत करना है।
--आईएएनएस
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