आरडीआई योजना के लिए फंड की कोई कमी नहीं, केवल प्रस्तावों की समीक्षा के लिए अस्थायी रोक: सरकार

आरडीआई योजना के लिए फंड की कोई कमी नहीं, केवल प्रस्तावों की समीक्षा के लिए अस्थायी रोक: सरकार

नई दिल्ली, 1 अक्टूबर (आईएएनएस)। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने गुरुवार को उन मीडिया रिपोर्टों का खंडन किया, जिनमें दावा किया गया था कि रिसर्च डेवलपमेंट एंड इनोवेशन (आरडीआई) योजना के तहत प्रस्ताव आमंत्रण प्रक्रिया को फंड की कमी के कारण बंद किया गया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि योजना के तहत पात्र प्रौद्योगिकी संस्थाओं (ईटीई) को धनराशि जारी करने के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं और फंड की कोई कमी नहीं है।

मंत्रालय ने कहा कि टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड (टीडीबी) द्वारा जारी प्रस्ताव आमंत्रण को केवल प्रशासनिक कारणों से अस्थायी रूप से रोका गया है। बड़ी संख्या में परियोजना प्रस्ताव प्राप्त होने के बाद सभी प्रस्तावों का मूल्यांकन करने के लिए यह कदम उठाया गया है। 30 सितंबर 2026 तक प्राप्त प्रस्तावों की समीक्षा पूरी होने के बाद आवेदन प्रक्रिया जल्द दोबारा शुरू की जाएगी।

बयान में आगे कहा गया है कि मीडिया में प्रकाशित यह दावा कि प्रस्ताव आमंत्रण बंद करने के पीछे धन की कमी है, पूरी तरह गलत है। टीडीबी ने अपनी वेबसाइट पर भी स्पष्ट किया है कि मौजूदा कॉल को केवल "एडमिनिस्ट्रेटिव रीजन" के आधार पर अस्थायी रूप से बंद किया गया है।

मंत्रालय ने बताया कि बड़ी संख्या में आवेदन आने के कारण निवेश समिति और टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड तेजी से मूल्यांकन प्रक्रिया पूरी करने में जुटे हैं। इसके लिए अधिकारी लगातार काम कर रहे हैं ताकि योग्य परियोजनाओं को जल्द मंजूरी दी जा सके।

बयान में कहा गया है कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) और अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) निकट भविष्य में अन्य सेकंड-लेवल फंड मैनेजर्स (एसएलएफएम) नियुक्त करने की प्रक्रिया में भी हैं, जिससे योजना के क्रियान्वयन और वित्तपोषण क्षमता को और मजबूत किया जा सके।

गौरतलब है कि डीएसटी और एएनआरएफ 1 लाख करोड़ रुपए की रिसर्च, डेवलपमेंट एंड इनोवेशन (आरडीआई) योजना के डिजाइन, वित्तपोषण और निगरानी के लिए जिम्मेदार शीर्ष सरकारी संस्थान हैं। इस योजना के तहत टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड एक फंड मैनेजर के रूप में कार्य करता है।

आरडीआई योजना का उद्देश्य उन कंपनियों, कॉर्पोरेट संस्थाओं और स्टार्टअप्स को समर्थन देना है, जो डीप-टेक, अनुसंधान एवं नवाचार आधारित तकनीकों पर काम कर रहे हैं। विशेष रूप से रणनीतिक और उभरते क्षेत्रों में कार्यरत संस्थाओं को इस योजना के तहत दीर्घकालिक और कम लागत वाली वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है।

योजना के तहत चयनित ईटीई को बड़े आकार के ऋण और वित्तीय सहायता दी जाती है। हालांकि, टीडीबी किसी परियोजना को धनराशि तभी जारी करता है, जब संबंधित संस्था गैर-सरकारी या निजी स्रोतों से निर्धारित अनुपात में पूंजी जुटाने में सफल हो जाती है।

मंत्रालय ने दोहराया कि आरडीआई योजना पूरी तरह सक्रिय है और इसका उद्देश्य भारत में अनुसंधान, नवाचार तथा उन्नत प्रौद्योगिकी विकास को बढ़ावा देना है। इसलिए फंड की कमी के कारण योजना प्रभावित होने की खबरें तथ्यात्मक रूप से गलत हैं।

सरकार का कहना है कि मूल्यांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद आवेदन आमंत्रण जल्द दोबारा शुरू किया जाएगा और योग्य परियोजनाओं को नियमानुसार वित्तीय सहायता मिलती रहेगी।

--आईएएनएस

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