नई दिल्ली, 1 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने दिव्यांगजनों (पीडब्ल्यूडी) को टोल छूट सुविधा का लाभ अधिक आसान और सुविधाजनक तरीके से उपलब्ध कराने के लिए छूट प्राप्त फास्टैग से जुड़े नियमों में संशोधन किया है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, नए दिशा-निर्देश 2 अक्टूबर 2026 से लागू होंगे।
सरकार ने कहा कि इन बदलावों का उद्देश्य पूरे देश में फास्टैग जारी करने की प्रक्रिया में एकरूपता लाना और लाभार्थियों को बार-बार होने वाली औपचारिकताओं से राहत देना है।
नए नियमों के तहत शारीरिक रूप से दिव्यांग व्यक्तियों के उपयोग के लिए विशेष रूप से डिजाइन और निर्मित वाहन, तथा 'दिव्यांगजन' स्वामित्व श्रेणी में पंजीकृत वाहनों को उनकी दिव्यांगता के प्रतिशत के आधार पर छूट प्राप्त फास्टैग जारी किया जाएगा। इसके लिए दिव्यांगता प्रमाणपत्र, यूनिक डिसेबिलिटी आईडी (यूडीआईडी) कार्ड या अन्य मान्य दस्तावेजों में दर्ज दिव्यांगता प्रतिशत को आधार बनाया जाएगा।
अब तक लागू व्यवस्था में दिव्यांगजनों को हर साल छूट प्राप्त फास्टैग का नवीनीकरण कराना पड़ता था। नई व्यवस्था में इसकी वैधता सीधे दिव्यांगता के प्रतिशत से जुड़ी होगी।
संशोधित दिशानिर्देशों के अनुसार, 70 प्रतिशत से 100 प्रतिशत दिव्यांगता वाले व्यक्तियों को जारी किया गया छूट प्राप्त फास्टैग 5 वर्ष तक मान्य रहेगा। वहीं 40 प्रतिशत से कम नहीं लेकिन 70 प्रतिशत से कम दिव्यांगता वाले लाभार्थियों के लिए फास्टैग की वैधता 3 वर्ष होगी।
निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद लाभार्थी पात्रता और राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियम, 2008 के प्रावधानों के अनुसार फास्टैग का नवीनीकरण करा सकेंगे।
सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था राष्ट्रीय राजमार्ग टोलिंग प्रणाली को दिव्यांगजनों के लिए अधिक सुलभ, पारदर्शी और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाएगी। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि टोल छूट केवल निर्धारित नियमों और पात्रता मानकों के अनुसार ही दी जाए।
इस बीच सरकार ने हाल ही में जानकारी दी थी कि पिछले वर्ष 15 अगस्त को शुरू किया गया फास्टैग एनुअल पास एक करोड़ उपयोगकर्ताओं का आंकड़ा पार कर चुका है। यह सुविधा गैर-व्यावसायिक वाहनों के लिए उपलब्ध है और राजमार्ग यात्रा ऐप के माध्यम से एकमुश्त शुल्क जमा कर सक्रिय की जा सकती है।
एनुअल पास के तहत 3,075 रुपए के एकमुश्त भुगतान पर एक वर्ष या 200 टोल प्लाजा क्रॉसिंग तक की वैधता मिलती है, जिससे बार-बार फास्टैग रिचार्ज कराने की आवश्यकता कम हो जाती है।
--आईएएनएस
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