नई दिल्ली, 3 अक्टूबर (आईएएनएस)। वैश्विक अर्थशास्त्रियों ने शनिवार को भारत की आर्थिक प्रगति की सराहना करते हुए सतत विकास, शिक्षा, मुक्त व्यापार और आय-आधारित कराधान के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि ये कारक भारत को एक प्रमुख वैश्विक आर्थिक शक्ति के रूप में उभरने में मदद कर सकते हैं।
5वें कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन (केईसी 2026) के साइडलाइन आईएएनएस से बातचीत में स्वीडिश अर्थशास्त्री डेनियल वाल्डेनस्ट्रॉम ने कहा कि भारत ने विकासोन्मुख नीतियों के जरिए प्रभावशाली प्रगति की है और वह आर्थिक विस्तार को व्यापक सामाजिक लाभ में बदलने की अच्छी स्थिति में है।
उन्होंने कहा, “तेजी से अपनी अर्थव्यवस्था का विस्तार करने के मामले में भारत सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। विकास पर ध्यान देना बहुत सकारात्मक रहा है और इससे शिक्षा, बुनियादी ढांचे और जीवन स्तर को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।”
वाल्डेनस्ट्रॉम ने कहा कि नीति-निर्माताओं को संपत्ति की असमानता की तुलना में आय की असमानता पर अधिक ध्यान देना चाहिए, क्योंकि आय का स्तर गरीबी और आर्थिक अवसरों की बेहतर तस्वीर पेश करता है।
उन्होंने कहा कि उद्यमियों की बढ़ती संपत्ति अकसर एक बढ़ती हुई और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था का संकेत हो सकती है।
कराधान के मुद्दे पर उन्होंने संपत्ति या विरासत कर पर निर्भर रहने के बजाय पूंजीगत आय पर कर लगाने की वकालत की। इसमें कॉरपोरेट मुनाफा, लाभांश और ब्याज से होने वाली आय शामिल है। उन्होंने कहा कि कई ओईसीडी देश धीरे-धीरे संपत्ति और विरासत करों से दूर हुए हैं।
यूरोपीय केंद्रीय बैंक के पूर्व अध्यक्ष और बैंक ऑफ फ्रांस के पूर्व गवर्नर ज्यां-क्लोद त्रिशे के अनुसार, भारत उस दिशा में “बहुत प्रभावशाली तरीके से” आगे बढ़ रहा है, जो भारत की स्वाभाविक दिशा है और जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण देशों में से एक है।
उन्होंने कहा, “निश्चित रूप से भारत दो प्रमुख उभरते देशों में से एक है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुदाय में एक अग्रणी देश भी है। इसलिए मैं भारत को इसी दिशा में आगे बढ़ते रहने और बड़ी सफलता हासिल करने के लिए प्रोत्साहित करूंगा।”
इस बीच, फ्रांसीसी अर्थशास्त्री ज्यां-पियरे लांदू ने भारत-फ्रांस के बीच बढ़ती साझेदारी की सराहना की और वैश्विक चुनौतियों से निपटने में भारत को एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला देश बताया। उन्होंने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ते संरक्षणवाद के बावजूद एशिया में व्यापार और निवेश मजबूत बने हुए हैं।
लांदू ने आईएएनएस से कहा, “हम एक चुनौतीपूर्ण वैश्विक माहौल का सामना कर रहे हैं, लेकिन इस समय दुनिया की समस्याओं को हल करने की कोशिश में भारत एक प्रमुख, बल्कि सबसे प्रमुख देशों में से एक है।”
इसके अलावा, चीन के अर्थशास्त्र के प्रोफेसर झांग लीकिंग ने भारतीय अर्थव्यवस्था को “काफी गतिशील और काफी मजबूत” बताया।
झांग ने कहा, “मेरा मानना है कि अब यह वैश्विक आर्थिक विकास के प्रमुख आकर्षणों में से एक बन गई है। इसलिए मैं भारत की अर्थव्यवस्था के सतत विकास और विश्व अर्थव्यवस्था में उसके बड़े योगदान की उम्मीद करता हूं।”
--आईएएनएस
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