बजट 2026 में रक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर पर सबसे ज्यादा फोकस होने की उम्मीद : रिपोर्ट

बजट 2026 में रक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर पर सबसे ज्यादा फोकस होने की उम्मीद : रिपोर्ट

नई दिल्ली, 22 जनवरी (आईएएनएस)। केंद्रीय बजट 2026 में सरकार वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए उन क्षेत्रों पर ज्यादा ध्यान देगी, जहां बड़े स्तर पर पूंजीगत खर्च किया जाता है। इनमें रक्षा क्षेत्र को सबसे ज्यादा फायदा मिलने की उम्मीद है। यह बात गुरुवार को जारी निवेश प्लेटफॉर्म स्मॉलकेस की रिपोर्ट में कही गई।

स्मॉलकेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सर्वे में शामिल करीब 40 प्रतिशत निवेश प्रबंधकों ने कहा कि इस बजट में रक्षा क्षेत्र को ज्यादा बजट मिल सकता है। इसकी वजह देश में रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देना, सेना का आधुनिकीकरण, रक्षा निर्यात की संभावनाएं और इस क्षेत्र में सरकार का लगातार खर्च है।

बजट से पहले किए गए इस सर्वे में 50 से ज्यादा निवेश प्रबंधकों ने हिस्सा लिया, जिसमें इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को दूसरा सबसे बड़ा लाभ पाने वाला क्षेत्र बताया गया। करीब 29 प्रतिशत लोगों का मानना है कि सड़क, रेलवे और अन्य बुनियादी ढांचे पर सरकारी खर्च से लंबे समय तक आर्थिक विकास को फायदा मिलेगा।

रिपोर्ट में कहा गया है कि मध्यम अवधि के लिए भारतीय शेयर बाजार के निवेशक सकारात्मक दिख रहे हैं। हालांकि, बजट के आसपास कुछ समय के लिए बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। ज्यादातर फंड मैनेजर भारतीय शेयर बाजार को लेकर सकारात्मक नजरिया रखते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, 82 प्रतिशत से ज्यादा लोगों को उम्मीद है कि निफ्टी50 वित्त वर्ष 2027 के अंत तक 25,000 अंक से ऊपर बंद होगा। वहीं 43 प्रतिशत निवेशकों का अनुमान है कि यह 25,000 से 27,500 के दायरे में रह सकता है।

महंगाई को लेकर भी निवेश प्रबंधक ज्यादा चिंतित नहीं हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि 85 प्रतिशत से अधिक लोग मानते हैं कि वित्त वर्ष 2027 में महंगाई दर 4 से 5 प्रतिशत या उससे कम रह सकती है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को भी बजट से फायदा मिलने की उम्मीद है। करीब 18 प्रतिशत लोगों ने इस क्षेत्र का नाम लिया, क्योंकि सरकार उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना के जरिए उद्योगों को लगातार समर्थन दे रही है।

खपत और कृषि क्षेत्रों को लेकर करीब 7-7 प्रतिशत लोगों ने समर्थन की उम्मीद जताई है। इससे संकेत मिलता है कि सरकार इन क्षेत्रों में सीमित और लक्षित मदद दे सकती है, न कि बड़े पैमाने पर राहत।

रिपोर्ट के अनुसार, करीब 80 प्रतिशत निवेश प्रबंधकों को बजट के आसपास बाजार में उतार-चढ़ाव की आशंका है। इसकी वजह नीतिगत फैसले, अचानक घोषणाएं और वैश्विक घटनाएं हो सकती हैं। हालांकि, उनका मानना है कि यह उतार-चढ़ाव ज्यादा समय तक नहीं रहेगा और बाजार जल्द ही अपने मूल आधार पर लौट आएगा।

टैक्स को लेकर रिपोर्ट में कहा गया है कि बड़े बदलाव की उम्मीद कम है। निवेशकों का मानना है कि कंपनियों के लिए टैक्स में बड़ी कटौती की गुंजाइश नहीं है, जबकि नौकरीपेशा लोगों के लिए सीमित राहत या टैक्स नियमों को आसान बनाया जा सकता है।

कंपनियों पर टैक्स में स्थिरता बनाए रखने की संभावना है और सरकार का ध्यान पूंजीगत खर्च से जुड़ी प्रोत्साहन योजनाओं और नियमों के पालन पर रहेगा।

रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार शहरों और गांवों में मांग बढ़ाने के लिए कुछ चुनिंदा कदम उठा सकती है, लेकिन बड़े पैमाने पर खर्च बढ़ाने से बचेगी, ताकि वित्तीय अनुशासन बना रहे।

--आईएएनएस

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