नई दिल्ली, 20 फरवरी (आईएएनएस)। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन के तहत सात नई पहलों (इंटरवेंशन) की शुरुआत की, जो केंद्र सरकार की एक प्रमुख पहल है। इसका उद्देश्य सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा के लिए सशक्त बनाना है।
ये नए कदम भारतीय निर्यातकों के सामने आने वाली मुख्य चुनौतियों को दूर करने, व्यापक और समावेशी निर्यात वृद्धि को बढ़ावा देने और भारत को वैश्विक स्तर पर मजबूत निर्यात शक्ति बनाने के लिए तैयार किए गए हैं।
मंत्री ने कहा कि आज भारत विकसित अर्थव्यवस्थाओं के साथ आत्मविश्वास से जुड़ रहा है। देश संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा करते हुए प्रतिस्पर्धी क्षेत्रों में लाभ सुनिश्चित कर रहा है। उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार का फायदा हर एमएसएमई, स्टार्टअप और उद्यमी तक पहुंचना चाहिए।
गोयल ने बताया कि एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन का उद्देश्य नए उत्पादों, सेवाओं और नए निर्यातकों को बढ़ावा देना है, साथ ही भारतीय कंपनियों को नए बाजारों तक पहुंच दिलाना है।
उन्होंने कहा कि फरवरी के पहले आधे महीने में भारत के माल निर्यात में दो अंकों की वृद्धि दर्ज की गई है, जो बाजार के भरोसे और उद्योग की सक्रिय भागीदारी को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि मिशन के तहत एमएसएमई के लिए प्रक्रियाओं को आसान बनाया जाएगा, कर्ज तक पहुंच बढ़ाई जाएगी, गुणवत्ता मानकों को मजबूत किया जाएगा, अंतरराष्ट्रीय नियमों के पालन में सहायता दी जाएगी और वैश्विक स्तर पर लॉजिस्टिक्स व वेयरहाउसिंग ढांचे का विस्तार किया जाएगा। दुबई में 'भारत मार्ट' जैसी विदेशी वेयरहाउसिंग पहल से भारतीय निर्यातकों को जीसीसी, अफ्रीका, मध्य एशिया और यूरोप के बाजारों तक रणनीतिक पहुंच मिलेगी।
एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन 'निर्यात प्रोत्साहन' के तहत वित्तीय सहायता और 'निर्यात दिशा' के तहत व्यापारिक सहयोग को एकीकृत और डिजिटल निगरानी वाले ढांचे में लागू करता है। इस मिशन को वाणिज्य विभाग द्वारा एमएसएमई मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, एक्जिम बैंक, सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट (सीजीटीएमएसई), नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (एनसीजीटीसी), बैंकों, विदेशों में भारतीय मिशनों और उद्योग संगठनों के सहयोग से लागू किया जा रहा है।
हाल ही में शुरू किए गए नए हस्तक्षेपों का उद्देश्य एमएसएमई के सामने आने वाली संरचनात्मक समस्याओं को दूर करना है। इनमें पूंजी की ऊंची लागत, व्यापार वित्त के सीमित विकल्प, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नियमों का पालन करने की जटिलता, लॉजिस्टिक्स से जुड़ी चुनौतियां और नए बाजारों में प्रवेश की बाधाएं शामिल हैं।
गोयल ने यह भी कहा कि भारत के मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के बढ़ते नेटवर्क ने भारतीय निर्यातकों के लिए बाजार तक पहुंच काफी बढ़ाई है। उन्होंने बताया कि नौ संपन्न एफटीए, जिनमें अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते का पहला चरण भी शामिल है, के जरिए भारत को अब वैश्विक जीडीपी के लगभग 70 प्रतिशत और दो-तिहाई वैश्विक व्यापार तक पहुंच मिल चुकी है। ये समझौते 38 विकसित और उभरती अर्थव्यवस्थाओं में विभिन्न क्षेत्रों में प्राथमिकता आधारित बाजार पहुंच प्रदान करते हैं।
--आईएएनएस
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