नई दिल्ली, 2 फरवरी (आईएएनएस)। यूनियन बजट 2026-27 पेश होने के बाद उद्योग जगत के दिग्गजों ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उद्योग क्षेत्र के नेताओं ने सोमवार को कहा कि सरकार की ओर से एआई मिशन, नेशनल क्वांटम मिशन, अनुसंधान नेशनल रिसर्च फंड और रिसर्च एंड इनोवेशन फंड जैसी नई तकनीकों को मिलने वाला समर्थन भारतीय उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन साबित होगा। ये संस्थान ही भारत के भविष्य के उद्यमियों (एंटरप्रेन्योर) को तैयार कर रहे हैं।
केंद्रीय बजट 2026 यह साफ संकेत देता है कि भारत अब सिर्फ टेक्नोलॉजी अपनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि अपनी तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
एआईओएनओएस के को-फाउंडर और वाइस चेयरमैन सीपी गुरनानी ने कहा कि एआई, सेमीकंडक्टर, क्लाउड और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर पर दिया गया जोर दिखाता है कि सरकार समझती है कि डिजिटल अर्थव्यवस्था में नेतृत्व मजबूत नींव से ही बनता है। इंडिया एआई मिशन को मजबूत करने से एआई रिसर्च, उसके इस्तेमाल और नैतिक नियमों को एक साथ आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि यह सिर्फ तकनीक तक सीमित एजेंडा नहीं है। एआई निवेश को स्किलिंग, वर्कफोर्स की तैयारी और एमएसएमई को सशक्त बनाने से जोड़कर बजट यह मानता है कि विकास, समावेश और प्रतिस्पर्धा साथ-साथ चलनी चाहिए।
सोना कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी के वाइस चेयरमैन चॉको वलियप्पा ने कहा कि अलग-अलग क्षेत्रों में तकनीक को शामिल करने का उद्देश्य किसानों को लाभ पहुंचाना, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और गणित (एसटीईएम) में महिलाओं का नामांकन बढ़ाना और नए अवसरों के लिए तैयार युवाओं को स्किल देना है।
उन्होंने बताया कि शिक्षा क्षेत्र के लिए 1,39,289 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जो 2025-26 के संशोधित अनुमान 1,21,949 करोड़ रुपए से 14.2 प्रतिशत ज्यादा है। हालांकि, संशोधित अनुमान के अनुसार शिक्षा पर वास्तविक खर्च बजट से 5 प्रतिशत कम रहा।
बजट में बड़े औद्योगिक और लॉजिस्टिक कॉरिडोर के पास पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप बनाने का प्रस्ताव दिया गया है, जहां कई यूनिवर्सिटी, कॉलेज, रिसर्च संस्थान और स्किल सेंटर होंगे। इसे एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।
चॉको वलियप्पा ने कहा कि तमिलनाडु, कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे राज्य, जहां मैन्युफैक्चरिंग और उच्च शिक्षा का मजबूत आधार है, ऐसी यूनिवर्सिटी टाउनशिप को आसानी से जगह दे सकते हैं।
उद्योग विशेषज्ञों के मुताबिक, यह बजट साफ संकेत देता है कि भारत की अगली विकास यात्रा एआई आधारित डिजिटल क्षमताओं, बड़े स्तर पर स्किल डेवलपमेंट और वैश्विक स्तर की टेक्नोलॉजी सेवाओं से आगे बढ़ेगी।
एनएलबी सर्विसेज के सीईओ सचिन अलुग ने कहा कि ‘एजुकेशन टू एम्प्लॉयमेंट एंड एंटरप्राइज’ फ्रेमवर्क पढ़ाई और उद्योग की जरूरतों के बीच की दूरी को कम करने का सही समय पर उठाया गया कदम है। खासकर एआई, डेटा इंजीनियरिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे क्षेत्रों में इसकी जरूरत ज्यादा है।
उन्होंने बताया कि टियर-2 और टियर-3 शहरों को डिजिटल इकोनॉमी जोन के रूप में विकसित करने से नए टैलेंट को मौका मिलेगा और मेट्रो शहरों से बाहर भी मजबूत टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम बनेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, आईटी सेवाओं के लिए एक समान फ्रेमवर्क और साफ टैक्स नियम बनाने का कदम कंपनियों को लंबे समय तक स्थिरता और भरोसा देगा।
--आईएएनएस
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