नई दिल्ली, 5 नवंबर (आईएएनएस)। उद्योग संगठन एसोचैम ने आगामी केंद्रीय बजट 2027-28 के लिए सरकार को दिए अपने प्री-बजट ज्ञापन में स्थिर और निवेश-अनुकूल कर व्यवस्था बनाने, कर विवादों को कम करने तथा दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर (एलटीसीजी) और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) को तर्कसंगत बनाने की सिफारिश की है। उद्योग निकाय का मानना है कि ऐसे कदम भारत को वैश्विक निवेश और विनिर्माण केंद्र के रूप में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद करेंगे।
एसोचैम ने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर सुधारों से संबंधित कई सुझाव देते हुए एक पारदर्शी, पूर्वानुमेय और निवेशकों के अनुकूल कर ढांचे की आवश्यकता पर जोर दिया। उद्योग संगठन का कहना है कि इससे आर्थिक वृद्धि को गति मिलेगी, घरेलू विनिर्माण को मजबूती मिलेगी, विदेशी निवेश आकर्षित होगा और कारोबार सुगमता में सुधार होगा।
एलटीसीजी कर व्यवस्था को लेकर एसोचैम ने सुझाव दिया है कि एक वर्ष से अधिक लेकिन दो वर्ष से कम अवधि तक रखी गई प्रतिभूतियों पर दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर की दर घटाकर 10 प्रतिशत की जाए। वहीं दो वर्ष से अधिक अवधि तक निवेश बनाए रखने वाले निवेशकों के लिए शून्य या लगभग 5 प्रतिशत की रियायती कर दर लागू करने पर विचार किया जाना चाहिए।
वैकल्पिक रूप से उद्योग संगठन ने सुझाव दिया है कि दीर्घकालिक निवेश रखने वाले निवेशकों को एलटीसीजी कर देनदारी के विरुद्ध सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) का क्रेडिट प्रदान किया जाए। एसोचैम का मानना है कि एलटीसीजी और एसटीटी के संयुक्त कर बोझ को कम करने से दीर्घकालिक निवेश को बढ़ावा मिलेगा, निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा और पूंजी बाजारों को समर्थन मिलेगा।
प्रत्यक्ष कर सुधारों के तहत एसोचैम ने नए विनिर्माण उद्यमों, विशेष रूप से रक्षा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में काम करने वाली कंपनियों के लिए रियायती कर व्यवस्था लागू करने की सिफारिश की है। उद्योग निकाय ने आयकर अधिनियम, 1961 की पूर्ववर्ती धारा 115बीएबी जैसी व्यवस्था को उचित पात्रता शर्तों और लंबी अवधि के साथ फिर से लागू करने का सुझाव दिया है, ताकि निवेश, रोजगार सृजन और निर्यात प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिल सके।
एसोचैम ने डेटा सेंटर भवनों, फाइबर-ऑप्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर, कूलिंग सिस्टम और ऊर्जा-कुशल 5जी नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए अलग परिसंपत्ति वर्गीकरण और तेज मूल्यह्रास लाभ देने की भी मांग की है।
उद्योग संगठन ने विदेशी कंपनियों के लिए भी कर नियमों में स्पष्टता लाने का सुझाव दिया है, विशेष रूप से उन कंपनियों के लिए जो भारतीय पुनर्विक्रेता संस्थाओं के माध्यम से डिजिटल कंटेंट और क्लाउड सेवाएं प्रदान करने हेतु डेटा सेंटर सेवाओं की खरीद करती हैं। सीमित प्रत्यक्ष बिक्री के लिए व्यावहारिक न्यूनतम सीमा तय करने की मांग भी की गई है।
एसोचैम ने न्यूनतम वैकल्पिक कर (एमएटी) व्यवस्था में सुधार का भी प्रस्ताव रखा है, खासकर उन कंपनियों के लिए जिन्होंने 31 मार्च 2026 से पहले रियायती कर व्यवस्था अपनाई थी तथा अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्रों (आईएफएससी) में कार्यरत विदेशी कंपनियों की इकाइयों के लिए।
कर विवादों को कम करने के उद्देश्य से उद्योग निकाय ने दंड व्यवस्था में सुधार की मांग की है। इसमें दंड आदेशों के लिए अलग कार्यवाही, प्रत्येक मुद्दे के आधार पर आरोपों का स्पष्ट विवरण, दंड से राहत संबंधी प्रावधानों का विस्तार तथा आयकर अपीलीय अधिकरण (आईटीएटी) में मामले लंबित रहने तक दंड वसूली पर रोक जैसे सुझाव शामिल हैं।
इसके अलावा एसोचैम ने विवाद समाधान समिति की पात्रता सीमा 10 लाख रुपए से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपए करने और बोर्ड फॉर एडवांस रूलिंग्स को अधिक प्रभावी बनाते हुए समयबद्ध और अंतिम निर्णय सुनिश्चित करने की सिफारिश की है।
अप्रत्यक्ष करों के क्षेत्र में उद्योग संगठन ने लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपए के पुराने सीमा शुल्क विवादों के समाधान के लिए एकमुश्त कस्टम्स विवाद समाधान (एमनेस्टी) योजना शुरू करने का सुझाव दिया है। साथ ही अपीलीय आदेशों के बाद स्वतः रिफंड, एक समान प्री-डिपॉजिट प्रणाली तथा समान प्रकृति के मामलों के लिए एकीकृत मूल्यांकन और अपील प्रक्रिया लागू करने की मांग की गई है।
भारत के बढ़ते मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) नेटवर्क को देखते हुए एसोचैम ने धारा 28डीए और
कैरोटार 2020 के तहत मूल स्थान सत्यापन प्रक्रियाओं को सरल और व्यावहारिक बनाने पर भी जोर दिया है। इसके लिए जोखिम-आधारित सुरक्षा आवश्यकताओं, समयबद्ध सत्यापन प्रक्रिया और डिजिटल हस्ताक्षरित मूल प्रमाण-पत्रों की स्वीकृति जैसे उपाय सुझाए गए हैं।
उद्योग संगठन का मानना है कि इन सुधारों से निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा, पूंजी बाजार मजबूत होंगे, वैश्विक निवेश प्रवाह को प्रोत्साहन मिलेगा और भारत को विनिर्माण तथा निवेश के लिए अधिक आकर्षक गंतव्य बनाने में मदद मिलेगी।
--आईएएनएस
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