'अधिकारों के लिए पहले भारतीय होना जरूरी', इमरान खान को भारत छोड़ने के नोटिस पर अशोक पंडित ने जताई खुशी

इमरान खान को भारत छोड़ने के नोटिस पर अशोक पंडित ने जताई खुशी, बोले- 'अधिकारों के लिए पहले भारतीय होना जरूरी'

मुंबई, 15 अक्टूबर (आईएएनएस)। फिल्ममेकर और फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (एफडब्ल्यूआईसीई) के चीफ एडवाइजर अशोक पंडित ने अभिनेता इमरान खान को भारत छोड़ने का नोटिस दिए जाने के फैसले का स्वागत किया है। इमरान खान अभिनेता आमिर खान के भांजे हैं।

आईएएनएस से बात करते हुए अशोक पंडित ने कहा कि भारतीय नागरिक के तौर पर अपने अधिकारों के लिए लड़ने से पहले व्यक्ति का भारतीय होना जरूरी है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन में इमरान की भागीदारी पर सवाल उठाए।

अशोक पंडित ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, ''देश के नागरिकों को संविधान और कानून को समझना चाहिए और उनका सम्मान करना चाहिए। मेरे हिसाब से इमरान खान को भारत छोड़ने के लिए कहे जाने का फैसला सही है, क्योंकि मेरा मानना है कि देश में हर काम संविधान और कानून के दायरे में होता है। लोगों को अपने अधिकारों और उनकी सीमाओं की जानकारी होनी चाहिए।''

दरअसल, मुंबई पुलिस ने इमरान खान को नोटिस जारी कर 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने के लिए कहा। यह कार्रवाई मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन में उनकी भागीदारी के कुछ दिन बाद हुई। इमरान को 10 अक्टूबर को इस प्रदर्शन के सिलसिले में पुलिस ने हिरासत में लिया था।

उनके खिलाफ इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट की धारा 7 और 29 के तहत कार्रवाई की गई है। बताया गया है कि वह भारतीय नागरिक नहीं हैं और इसके बावजूद विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए थे।

इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए अशोक पंडित ने कहा, ''मैं अपने देश के अधिकारियों, भारत सरकार और मंत्रालय की ओर से उन्हें देश छोड़ने के लिए कहने के फैसले का स्वागत करता हूं।''

उन्होंने आगे कहा, ''इमरान अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतर आए, लेकिन उन्हें यह समझना चाहिए कि उनके अधिकार क्या हैं। भारतीय के तौर पर अपने अधिकारों के लिए लड़ने के लिए पहले भारतीय होना जरूरी है। यह उनके लिए एक सीख साबित होगी। नागरिकों को अपने अधिकारों और देश के कानून की जानकारी होनी चाहिए।''

अशोक पंडित ने विरोध प्रदर्शन में इमरान की भागीदारी पर टिप्पणी करते हुए कहा, ''ऐसा लगा जैसे वह किसी गंभीर मुद्दे के बजाय शिवाजी पार्क में क्रिकेट खेलने पहुंचे हों। अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर संविधान और कानून का मजाक नहीं बनाया जाना चाहिए। सरकार ने ऐसे मामलों में सख्त रुख अपनाकर सही कदम उठाया है। उनको भारत सरकार के अधिकारियों से सवाल पूछने से पहले यह समझना चाहिए था कि उन्हें किन अधिकारों के तहत ऐसा करने की अनुमति है।''

अशोक पंडित ने आरोप लगाया कि अगर कोई व्यक्ति इंडस्ट्री में वापसी करने या अपना करियर बनाने के लिए गंभीर राष्ट्रीय मुद्दों का इस्तेमाल करता है, तो यह गलत तरीका है। इस कार्रवाई से उन लोगों को भी संदेश मिलेगा जो कानून की अनदेखी करते हुए सड़कों पर विरोध प्रदर्शन करते हैं। भारत में व्यवस्था संविधान के मुताबिक चलती है और यहां न्यायपालिका, अदालतें तथा कानून की एक तय प्रक्रिया है।

--आईएएनएस

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