न्यूयॉर्क, 15 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश के अनुसार, बीआर अंबेडकर द्वारा दिया गया ‘संवैधानिक नैतिकता’ का सिद्धांत आज की उस दुनिया में बहुपक्षवाद को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है, जो संघर्षों और राजनीतिक विभाजनों से जूझ रही है।
मंगलवार को यहां अंबेडकर जयंती के मौके पर पी हरीश ने कहा कि भारतीय संविधान बनाने वाले का नैतिकता और कानून का नजरिया, जब बहुपक्षवाद पर लागू होता है, तो यूएन में सुधार और उसे फिर से जिंदा करने में मदद कर सकता है।
अंबेडकर की 135वीं जयंती पर यहां एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें “डॉ. बीआर अंबेडकर का संवैधानिक नैतिकता का नजरिया और बहुपक्षवाद के लिए इसकी अहमियत” पर चर्चा हुई।
अंबेडकर के काम के जानकार राजा शेखर वुंडरू ने कहा कि दो विश्व युद्ध देखने और यूएन को बनते देखने के बाद, उन्होंने बहुपक्षवाद की अहमियत को पहचाना।
हरियाणा सरकार के अतिरिक्त मुख्स सचिव वुंडरू, “अंबेडकर, गांधी और पटेल: द मेकिंग ऑफ इंडियाज इलेक्टोरल सिस्टम” के लेखक हैं। उन्होंने कहा कि अंबेडकर ने जो भारतीय संविधान बनाया, वह शांति के लिए यूएन के चार्टर की भावना को दिखाता है।
संवैधानिक नैतिकता के बारे में अंबेडकर के विचार बहुपक्षवाद और यूएन चार्टर के पालन को बढ़ावा दे सकते हैं।
हार्वर्ड डिविनिटी स्कूल में विजिटिंग प्रोफेसर संतोष राउत ने कहा कि अंबेडकर संविधान को सामाजिक न्याय और आर्थिक बदलाव का जरिया मानते थे, ये विचार इन क्षेत्रों में यूएन के लक्ष्यों के लिए जरूरी हैं।
बौद्ध धर्म के जानकार ने कहा कि नैतिकता वह ताकत है जो यूएन चार्टर जैसे लिखे हुए ग्रंथों की भावना को लागू करने में मदद करती है और अंबेडकर ने इसकी पहले से ही कल्पना कर ली थी।
इससे इतर भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग कर रहा है। यूएन में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने यूएनएससी में दो-स्तरीय (टू टियर) स्थायी सदस्यता वाले स्तर का विरोध किया और जी4 के यूएनएससी में सुधार के बाद 15 साल के लिए वीटो पावर को टालने के प्रस्ताव पर सहमति जताई।
बता दें, यूएनएससी में 'टू-टियर' स्थायी सदस्यता प्रस्ताव नए सदस्यों के लिए स्थायी सीटों की एक नई कैटेगरी बनाने की बात करता है। पी5 (अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस, ब्रिटेन) के पास अभी मौजूद वीटो पावर इन नए स्थायी सदस्यों में शामिल नहीं है। भारत इसका विरोध कर रहा है।
यूएन में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए पी हरिश ने कहा, "सबसे पहले, दो मूल कारण हैं जिनकी वजह से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का ढांचा असंतुलित नजर आता है और उसकी वैधता व प्रतिनिधित्व पर सवाल उठते हैं, ये हैं सदस्यता और वीटो प्रणाली। इन दोनों पहलुओं में सुधार की आवश्यकता को लेकर व्यापक सहमति है। यह भी स्पष्ट है कि करीब 80 साल पहले बना यह ढांचा आज की बदलती भू-राजनीतिक वास्तविकताओं के अनुरूप नहीं रह गया है। इन मुद्दों पर पहले भी विस्तार से चर्चा हो चुकी है, और खास तौर पर वीटो व्यवस्था पर विचार-विमर्श अंतर-सरकारी वार्ताओं (आईजीएन) के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।"
--आईएएनएस
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