नई दिल्ली, 13 अगस्त (आईएएनएस)। टाटा समूह के स्वामित्व वाली एयर इंडिया ने सुरक्षा मानकों को और मजबूत करने के उद्देश्य से समूह के सभी पायलटों के लिए अनिवार्य ड्रग और प्रतिबंधित दवाओं की जांच शुरू करने का फैसला किया है। सूत्रों के अनुसार, यह फैसला हाल ही में फुकेट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की एक फ्लाइट में गंभीर टर्बुलेंस और अचानक ऊंचाई में गिरावट की घटना के बाद लिया गया है।
आईएएनएस द्वारा देखे गए पायलटों को संबोधित पत्र में कहा गया है कि यह स्क्रीनिंग कार्यक्रम 13 अगस्त से लागू हो गया है और एयर इंडिया समूह के सभी पायलट इसके दायरे में आएंगे। कंपनी ने कहा है कि वर्षों से एयर इंडिया ने अपने पायलटों और कर्मचारियों की पेशेवर क्षमता, कौशल और सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता के दम पर अपनी पहचान बनाई है। ऐसे में यात्रियों का भरोसा बनाए रखना कंपनी की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
एयर इंडिया ने अपने संचार में कहा कि हाल के दिनों में कई पायलटों ने भी सुरक्षा और पेशेवर मानकों को लेकर अपनी चिंताओं और सुझावों को साझा किया है। कंपनी ने बताया कि वह पहले से ही नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) द्वारा निर्धारित सभी नियमों का पालन करती है, जो यूरोप और अमेरिका जैसे प्रमुख विमानन बाजारों में अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं के अनुरूप हैं।
हालांकि एयरलाइन ने कहा कि उसने मौजूदा नियामकीय आवश्यकताओं से आगे बढ़कर अतिरिक्त कदम उठाने का फैसला किया है। इसी के तहत अब सभी पायलटों की व्यापक जांच की जाएगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे किसी ऐसी दवा या पदार्थ का सेवन नहीं कर रहे हैं जो विमानन नियमों के तहत प्रतिबंधित है।
कंपनी के पत्र में कहा गया है, "हमने यह निर्णय लिया है कि समूह के सभी पायलटों की उन दवाओं और पदार्थों के लिए पूर्ण स्क्रीनिंग की जाए, जिनकी अनुमति वर्तमान विमानन नियमों के अंतर्गत नहीं है।"
एयर इंडिया ने स्पष्ट किया कि यह परीक्षण सभी पायलटों के लिए अनिवार्य होगा। स्क्रीनिंग का आयोजन गुरुग्राम स्थित प्रशिक्षण अकादमी में प्रशिक्षण सत्रों के दौरान, उड़ानों के बाद फ्लाइट ब्रीफिंग सेंटरों और एयर इंडिया कार्यालयों में या विभिन्न परिचालन बेस पर निर्धारित स्थानों पर किया जाएगा।
एयरलाइन ने इस पहल को केवल नियामकीय अनुपालन तक सीमित नहीं बताया, बल्कि इसे सुरक्षा और पेशेवर उत्कृष्टता के उच्चतम मानकों को बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम कहा। कंपनी का मानना है कि इससे यात्रियों, निवेशकों और अन्य हितधारकों के बीच विश्वास और मजबूत होगा।
एयर इंडिया ने पायलटों से यह भी कहा है कि यदि उन्हें इस स्क्रीनिंग कार्यक्रम से संबंधित किसी प्रकार की जानकारी या स्पष्टीकरण चाहिए, तो वे अपने चीफ पायलट या बेस मैनेजर से संपर्क कर सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार, यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि पिछले सप्ताह फुकेट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की उड़ान के पायलट-इन-कमांड के बारे में जानकारी मिली थी कि वह नींद संबंधी समस्या के लिए दवा ले रहे थे। उड़ान के दौरान विमान को अचानक ऊंचाई में गिरावट का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद इस मामले ने खासा ध्यान आकर्षित किया।
--आईएएनएस
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