नई दिल्ली, 29 अप्रैल (आईएएनएस)। राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित 'रेजिलिएंट फ्यूचर्स समिट 2026' के दौरान मीडिया से बातचीत में केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है।
उन्होंने बताया कि 2030 तक 500 गीगावाट ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य रखा गया है, जबकि गैर-जीवाश्म (नॉन-फॉसिल) स्रोतों से 50 प्रतिशत बिजली उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित समय से पांच साल पहले ही हासिल कर लिया गया है। यह दर्शाता है कि सरकार के तय किए गए लक्ष्य समय से पहले पूरे हो रहे हैं।
मंत्री ने कहा कि भारत में अब पवन ऊर्जा, सौर ऊर्जा, बैटरी स्टोरेज और पंप स्टोरेज जैसे स्रोतों से मिलकर करीब 30 प्रतिशत बिजली उत्पादन हो रहा है। हाल ही में पीक डिमांड के समय करीब दो-तिहाई बिजली की जरूरत नवीकरणीय ऊर्जा से पूरी की गई, जो यह दिखाता है कि भारत न केवल ऊर्जा उत्पादन बढ़ा रहा है, बल्कि उसे प्रभावी ढंग से ट्रांसमिशन तक भी पहुंचा रहा है। उन्होंने इसे भारत की 'सक्सेस स्टोरी' बताया।
पूर्व कोयला मंत्री के रूप में अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि भारत में ऐसे कोयले का आयात घटा है, जिसे देश में उपलब्ध संसाधनों से बदला जा सकता है। हालांकि, कुछ विशेष पावर प्लांट्स और मेटल इंडस्ट्री के लिए अब भी कोयले का आयात जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जहां भारतीय कोयला इस्तेमाल हो रहा है, वहां आयात की जरूरत नहीं पड़ रही है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि देश में बड़े स्तर पर ऊर्जा क्षमता का विस्तार किया जा रहा है और सरकार 2027 तक निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने के लिए तेजी से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि अभी तक काफी क्षमता स्थापित की जा चुकी है, लेकिन आगे भी बड़ी मात्रा में काम बाकी है, जिसे 'यूटिलिटी-लेड मॉडल' के जरिए पूरा करने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत ने सौर ऊर्जा और ग्रीन एनर्जी सेक्टर में शानदार काम किया है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश ने इस क्षेत्र में तेज गति से प्रगति की है और आने वाले समय में भी कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम जारी रहेगा।
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