भागलपुर, 10 मार्च (आईएएनएस)। बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग तथा जिला प्रशासन भागलपुर के संयुक्त तत्वावधान में मंजूषा महोत्सव का आयोजन किया गया। तीन दिवसीय इस आयोजन में काफी संख्या में महिलाएं अपने हुनर को प्रदर्शित कर रही हैं। मंजूषा कलाकारों ने पीएम मोदी का तह दिल से धन्यवाद करते हुए कहा कि उन्होंने मंजूषा को सिर्फ जीआई टैग नहीं, बल्कि हम जैसे कलाकारों को नई शक्ति प्रदान की है।
पांच साल पहले 14 सितंबर 2021 को भागलपुर की लोक कला मंजूषा आर्ट को जीआई टैग मिला। उसके बाद से ही मंजूषा लोककला की पहचान अंतरराष्ट्रीय हो चली है। बिहार सरकार के कला संस्कृति विभाग द्वारा भागलपुर में मंजूषा महोत्सव का तीन दिवसीय आयोजन किया जा रहा है।
नारी सशक्तीकरण और सनातन की ताकत में मंजूषा ने नई जान फूंकी है। न सिर्फ देश के अंदर, बल्कि पड़ोसी राष्ट्र नेपाल में भी मंजूषा की धमक बढ़ चली है। भारत सरकार द्वारा जीआई टैग मिलने के बाद मंजूषा आर्ट से जुड़े उत्पाद की मांग बढ़ गई, नतीजा उत्पादन बढ़ा और उसी हिसाब से रोजगार सृजन और आमदनी भी बढ़ी।
भागलपुर में कला संस्कृति अधिकारी अंकित रंजन पाठक, मंजूषा कलाकार पवन कुमार सागर और अंजना कुमारी ने आईएएनएस से बातचीत की।
अंकित रंजन पाठक ने कहा कि पीएम मोदी ने मंजूषा आर्ट को जीआई टैग देकर घर में बैठी महिलाओं को ताकत दी है। मंजूषा कलाकार अंजना कुमारी ने कहा कि हमारी कला को जीआई टैग मिला है। पीएम मोदी द्वारा जीआई टैग मिलने से हम लोगों का काम सिर्फ घर तक सीमित नहीं रह गया है, अब देशभर में होने वाले कार्यक्रमों में हमें बुलाया जाता है।
महिला सशक्तीकरण के तहत हम लोगों ने अपनी कला को कई उत्पादों पर उकेर कर दिखाया गया। साड़ी, दुपट्टा, सूट, पर्स हर तरह के उत्पाद पर अपने हुनर को प्रदर्शित कर रहे हैं। मंजूषा को जीआई टैग मिलने से आमदनी बढ़ी है। हम लोग अपनी कला को दिखाने के लिए जम्मू-कश्मीर से लेकर नेपाल भी गए हैं।
उन्होंने कहा कि हम सभी कलाकार पीएम मोदी को धन्यवाद करते हैं कि उन्होंने सिर्फ मंजूषा को जीआई टैग नहीं, महिलाओं को एक शक्ति दी है।
मंजूषा कलाकार पवन कुमार सागर ने कहा कि जब से जीआई टैग मिला है, मंजूषा कला का ज्यादा प्रचार-प्रसार हो रहा है। इस कला से जुड़कर महिलाएं रोजगार भी पा रही हैं। पीएम मोदी ने मंजूषा आर्ट को एक पहचान दिलाई है, जिसका वह शायद हकदार था। पीएम मोदी जब भी भागलपुर आते हैं तो इस कला के बारे में बात करते हैं, जिससे इस कला को एक बड़ा प्लेटफॉर्म मिला है।
--आईएएनएस
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