जीईएम ने बदली सरकारी खरीद की तस्वीर, 10 साल में 400 करोड़ से 5 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचा कारोबार: सीईओ मिहिर कुमार

जीईएम ने बदली सरकारी खरीद की तस्वीर, 10 साल में 400 करोड़ से 5 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचा कारोबार: सीईओ मिहिर कुमार

नई दिल्ली, 9 जून (आईएएनएस)। सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) ने पिछले एक दशक में सरकारी खरीद व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाते हुए छोटे व्यापारियों, महिला उद्यमियों और स्टार्टअप्स को अभूतपूर्व अवसर प्रदान किए हैं। जीईएम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) मिहिर कुमार ने बताया कि यह प्लेटफॉर्म पूरी तरह डिजिटल है, जहां विक्रेता पंजीकरण से लेकर ऑर्डर की डिलीवरी और भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होती है।

जीईएम के सीईओ मिहिर कुमार ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि जब जीईएम की शुरुआत हुई थी, तब पहले वर्ष में इसका कारोबार केवल 400 से 422 करोड़ रुपए के आसपास था, लेकिन आज यह बढ़कर 5 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो चुका है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म ने सरकारी खरीद प्रणाली को अधिक पारदर्शी, तेज और समावेशी बनाया है।

मिहिर कुमार ने आगे कहा कि सरकार की नीति के तहत सरकारी खरीद का कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सा सूक्ष्म और लघु उद्यमों (एमएसई) से किया जाना चाहिए, जबकि जीईएम पोर्टल पर यह आंकड़ा करीब 45 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। इससे छोटे कारोबारियों को सीधे सरकारी बाजार से जुड़ने और अपने उत्पादों की बिक्री बढ़ाने का अवसर मिला है।

उन्होंने कहा कि जीईएम की सफलता केवल कारोबार बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने लाखों उद्यमियों को आर्थिक रूप से सशक्त भी बनाया है। प्लेटफॉर्म पर बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण खरीदारों को बेहतर कीमतें और अधिक विकल्प मिल रहे हैं, जिससे सरकारी संस्थानों को भी लाभ हो रहा है।

जीईएम पर महिला उद्यमियों और स्टार्टअप्स की भागीदारी में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। मिहिर कुमार ने बताया कि शुरुआती दौर में स्टार्टअप्स के माध्यम से होने वाला कारोबार केवल 2 करोड़ रुपए के आसपास था, जो अब बढ़कर 50,000 करोड़ रुपए से अधिक हो गया है।

इसी तरह महिला उद्यमियों का कारोबार भी 70 करोड़ रुपए से बढ़कर 80,000 करोड़ रुपए से अधिक हो चुका है। इससे स्पष्ट है कि जीईएम महिलाओं और नए उद्यमियों के लिए आर्थिक अवसरों का एक बड़ा मंच बनकर उभरा है।

जीईएम के सीईओ ने बताया कि सरकारी ई-मार्केटप्लेस की शुरुआत वर्ष 2016 में हुई थी और अब यह अपने 10 वर्षों के सफर को पूरा कर रहा है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक खरीद के क्षेत्र में जीईएम ने वैश्विक स्तर पर एक नई मिसाल कायम की है।

उन्होंने कहा कि दक्षिण कोरिया के केओएनईपीएस पोर्टल को छोड़ दें तो दुनिया में बहुत कम ऐसे उदाहरण हैं, जहां सरकारी खरीद को एक डिजिटल मार्केटप्लेस के रूप में विकसित किया गया हो। भारत सरकार की यह पहल पारदर्शिता, दक्षता और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने वाला एक प्रेरणादायक मॉडल बन चुकी है।

इस बीच, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा मंगलवार को जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) ने देश में समावेशी विकास को बढ़ावा देने में बड़ी भूमिका निभाई है। जीईएम प्लेटफॉर्म पर पंजीकृत सूक्ष्म और लघु उद्यमों (एमएसई) की संख्या 2016-17 में केवल 2,396 थी, जो अब बढ़कर 11.9 लाख से अधिक हो गई है।

एमएसई से सरकारी खरीद का मूल्य भी 69 करोड़ रुपए से बढ़कर 8.69 लाख करोड़ रुपए से अधिक पहुंच गया है। इसी अवधि में ऑर्डरों की संख्या 2,994 से बढ़कर 2.17 करोड़ से ज्यादा हो गई है।

इस प्लेटफॉर्म ने उन समूहों को भी सरकारी खरीद प्रक्रिया में भागीदारी का अवसर दिया है, जो पहले अपेक्षाकृत कम प्रतिनिधित्व रखते थे। महिला स्वामित्व वाले एमएसई की संख्या जीईएम पर 2016-17 में 268 थी, जो अब बढ़कर 2.16 लाख से अधिक हो गई है। इनसे की गई खरीद का मूल्य 8 करोड़ रुपए से बढ़कर 93,327 करोड़ रुपए से ज्यादा हो गया है।

इसके अलावा, स्टार्टअप्स की भागीदारी भी तेजी से बढ़ी है। 2016-17 में जहां केवल 88 स्टार्टअप्स जीईएम से जुड़े थे, वहीं अब उनकी संख्या 40,000 से अधिक हो गई है। इनसे की गई खरीद 2 करोड़ रुपए से बढ़कर 61,400 करोड़ रुपए से ज्यादा पहुंच चुकी है।

इसी तरह, अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग से जुड़े पंजीकृत एमएसई की संख्या 38 से बढ़कर 66,000 से अधिक हो गई है। इनसे की गई खरीद का मूल्य 21,800 करोड़ रुपए से ज्यादा हो चुका है। मंत्रालय के अनुसार, यह दर्शाता है कि जीईएम के माध्यम से सरकारी खरीद प्रक्रिया में विभिन्न वर्गों की भागीदारी लगातार बढ़ी है।

सरकारी खरीद के अलावा, जीईएम ने सार्वजनिक सेवाओं की आपूर्ति में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है, खासकर स्वास्थ्य क्षेत्र में। इस प्लेटफॉर्म के जरिए 324 करोड़ से अधिक वैक्सीन डोज और 199 करोड़ सिरिंज की खरीद की गई है। इसके अलावा, वंदे भारत ट्रेनों के लिए मेडिकल किट, डायग्नोस्टिक उपकरण और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कई अन्य उत्पादों और सेवाओं की खरीद भी इसी प्लेटफॉर्म के माध्यम से हुई है।

जीईएम के विकास में तकनीक की भी अहम भूमिका रही है। प्लेटफॉर्म आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित टूल्स, एडवांस एनालिटिक्स, डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम और पारदर्शी नीलामी प्रक्रियाओं का उपयोग कर रहा है, जिससे खरीद प्रक्रिया अधिक कुशल, जवाबदेह और उपयोगकर्ता-अनुकूल बन रही है।

मंत्रालय ने कहा कि 'विकसित भारत' के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ते हुए जीईएम डिजिटल खरीद प्रणाली को और मजबूत करने पर काम कर रहा है। इसके लिए नवाचार, बेहतर उपयोगकर्ता अनुभव और वैश्विक स्तर की सर्वोत्तम प्रक्रियाओं को अपनाया जा रहा है। यह प्लेटफॉर्म सरकारी संस्थानों, कारोबारियों और उद्यमियों के लिए एक महत्वपूर्ण डिजिटल मार्केटप्लेस के रूप में काम कर रहा है।

सरकार के एक बड़े प्रशासनिक सुधार के रूप में शुरू किए गए जीईएम ने सार्वजनिक खरीद प्रणाली को पारंपरिक और बिखरी हुई व्यवस्था से निकालकर डिजिटल और डेटा-आधारित प्रणाली में बदल दिया है। मानव हस्तक्षेप कम होने, पारदर्शिता बढ़ने और सरकारी खरीद के अवसरों तक आसान पहुंच मिलने से देशभर के विभिन्न उद्यमों और क्षेत्रों की भागीदारी बढ़ी है।

जीईएम ने कारोबार करने में आसानी (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) को भी मजबूत किया है। ऑनलाइन पंजीकरण, पारदर्शी बोली प्रक्रिया, डिजिटल कॉन्ट्रैक्ट प्रबंधन और पूरी तरह ऑनलाइन खरीद व्यवस्था के माध्यम से इसने छोटे-बड़े सभी व्यवसायों के लिए सरकारी आपूर्ति शृंखला में शामिल होने के अवसर बढ़ाए हैं।

--आईएएनएस

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