गंगा सप्तमी पर गुरु पुष्य योग के साथ पूरे दिन रहेगा सर्वार्थ सिद्धि योग, नोट कर लें शुभ-अशुभ समय

गंगा सप्तमी पर गुरु पुष्य योग के साथ पूरे दिन रहेगा सर्वार्थ सिद्धि योग, नोट कर लें शुभ-अशुभ समय

नई दिल्ली, 22 अप्रैल (आईएएनएस)। बैशाख मास शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर देवी गंगा को समर्पित गंगा सप्तमी का पर्व मनाया जाता है। इस साल गंगा सप्तमी गुरुवार (23 अप्रैल) को है। इस दिन देवी गंगा की आराधना, स्नान और दान-पुण्य विशेष फलदायी माना जाता है। शुभ मुहूर्त में पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस पर्व पर गुरु पुष्य योग के साथ पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग प्रभावी रहेगा।

गंगा सप्तमी को गंगा जन्मोत्सव या गंगा पूजन के रूप में भी मनाया जाता है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी गंगा का जन्म इसी दिन हुआ था। वहीं, गंगा दशहरा के दिन पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं। उनका प्रवाह इतना तेज था कि पृथ्वी का संतुलन बिगड़ सकता था। तब भगवान शिव ने उन्हें अपनी जटाओं में धारण कर लिया। बाद में शिवजी ने गंगा को जटाओं से मुक्त किया, ताकि वे भागीरथ के पूर्वजों की शापित आत्माओं को शुद्ध कर सकें।

धार्मिक मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान और पूजन से पापों का नाश होता है व पितरों को तृप्ति मिलती है। 23 अप्रैल को सूर्योदय 5 बजकर 48 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 51 मिनट पर होगा। तिथि शुक्ल सप्तमी रात 8 बजकर 49 मिनट तक रहेगी। इसके बाद अष्टमी तिथि लग जाएगी। हालांकि, उदया तिथि के हिसाब से पूरे दिन सप्तमी तिथि का ही मान होगा। नक्षत्र पुनर्वसु रात 8 बजकर 57 मिनट तक. उसके बाद पुष्य रहेगा। योग सुकर्मा सुबह 6 बजकर 8 मिनट तक, उसके बाद धृति है,जो अगले दिन तक (24 अप्रैल को सुबह 3 बजकर 32 मिनट तक) रहेगा।

गंगा सप्तमी पर शुभ मुहूर्त की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 20 मिनट से 5 बजकर 4 मिनट तक, अभिजित मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 54 मिनट से 12 बजकर 46 मिनट तक, विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 22 मिनट तक रहेगा। वहीं, गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 50 मिनट से 7 बजकर 12 मिनट तक, अमृत काल शाम 6 बजकर 41 मिनट से 8 बजकर 11 मिनट तक है। इसके साथ ही गुरु पुष्य योग शाम 8 बजकर 57 मिनट से अगले दिन( 24 अप्रैल) सुबह 5 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। सर्वार्थ सिद्धि योग पूरे दिन प्रभावी रहेगा। साथ ही अमृत सिद्धि योग शाम 8 बजकर 57 मिनट से अगले दिन (24 अप्रैल) सुबह 5 बजकर 47 मिनट तक रहेगा।

अशुभ समय की बात करें तो गुरुवार को राहुकाल दोपहर 1 बजकर 58 मिनट से 3 बजकर 36 मिनट तक, यमगंड सुबह 5 बजकर 48 मिनट से 7 बजकर 26 मिनट तक, गुलिक काल सुबह 9 बजकर 4 मिनट से 10 बजकर 42 मिनट तक रहेगा। दुर्मुहूर्त सुबह 10 बजकर 9 मिनट से 11 बजकर 1 मिनट व दोपहर 3 बजकर 22 मिनट से 4 बजकर 15 मिनट, आडल योग सुबह 5 बजकर 48 मिनट से शाम 8 बजकर 57 मिनट तक व वर्ज्य समय सुबह 9 बजकर 35 मिनट से 11 बजकर 6 मिनट तक रहेगा। गंगा सप्तमी पर भद्रा की छाया भी रहेगाी। भद्रा शाम 8 बजकर 49 मिनट से अगले दिन (24 अप्रैल) सुबह 5 बजकर 47 मिनट तक रहेगी।

--आईएएनएस

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