नई दिल्ली, 8 जून (आईएएनएस)। सीजफायर का ठीक दो महीना पूरा होते-होते इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष शुरू हो गया। लेबनान पर हिज्बुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई को मुख्य कारण बताते हुए तेहरान ने हमला बोला, तो इजरायली सेना ने भी ताबड़तोड़ हवाई हमले शुरू कर दिए। इस बीच डोनाल्ड ट्रंप का बयान भी चर्चा में है, जिसमें उन्होंने जवाबी हमला न करने की सलाह तेल अवीव को दी। बदले हालात के बीच आगे क्या हो सकता है, ट्रंप का फैसला क्या होगा? आईएएनएस के कुछ ऐसे ही सवालों के जवाब पूर्व राजनयिक केपी फैबियन ने दिए।
पूर्व राजनयिक ने ट्रंप के स्टैंड को लेकर कहा, " ईरान और इजरायल के बीच हालिया सैन्य कार्रवाई से निश्चित तौर पर तनाव बढ़ा है, लेकिन इससे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को यह कहने का अवसर भी मिल सकता है कि दोनों पक्ष जवाबी कार्रवाई कर चुके हैं और अब संघर्ष को यहीं रोक देना चाहिए।"
उनके अनुसार, यदि ट्रंप इस पर जोर देते हैं, तो इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को उनकी बात माननी पड़ेगी। उन्होंने तर्क दिया, "भले ही दुनिया सोचे कि इजरायली सेना बहुत शक्तिशाली है लेकिन एक सच ये भी है कि इजरायल की सैन्य ताकत काफी हद तक अमेरिका के हथियारों, तकनीक और कूटनीतिक समर्थन पर निर्भर है।"
लेबनान पर हिज्बु्ल्लाह के खिलाफ इजरायली हमले को पूर्व राजनयिक ने नए संघर्ष का कारण बताया। उन्होंने कहा, "ईरान लंबे समय से यह कहता रहा है कि युद्धविराम सभी मोर्चों पर लागू होना चाहिए। हिज्बुल्लाह और इजरायल के बीच संघर्ष में भी यही मुद्दा रहा है। हिज्बुल्लाह की स्थिति स्पष्ट है। वो चाहता है कि दक्षिणी लेबनान से पीछे हटे और बमबारी बंद करे, तभी वह युद्धविराम पर सहमत होगा।"
फैबियन ने यह भी कहा कि ईरान ने ऐसे समय में कदम उठाया है जब ट्रंप एक कठिन स्थिति में हैं। उनके अनुसार, क्षेत्रीय युद्ध का खतरा बना हुआ है, खासकर तब जब हूती ने इजरायल की ओर रॉकेट दागे हैं।
संघर्ष से मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ा है। पूर्व राजनयिक ने चेतावनी दी कि यदि संघर्ष बढ़ता है और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य बंद हो जाता है, तो स्वेज नहर तक समुद्री यातायात पर इसका असर पड़ेगा। उनके अनुसार, यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और बाब-अल-मंदेब दोनों मार्ग बाधित होते हैं, तो वैश्विक व्यापार पर गंभीर असर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि एक संभावना यह है कि ट्रंप नेतन्याहू से कहें कि दोनों पक्ष जवाबी कार्रवाई कर चुके हैं और अब संघर्ष समाप्त होना चाहिए। लेकिन यदि ऐसा नहीं होता, तो युद्ध जारी रह सकता है और उसके आर्थिक परिणाम पूरी दुनिया को प्रभावित कर सकते हैं।
--आईएएनएस
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