कांग्रेस चुनावी फायदे के लिए अवसरवादी गठबंधन कर रही है : एमए बेबी (आईएएनएस साक्षात्कार)

केरल में तीसरी बार सत्ता का दावा, बंगाल में नई रणनीति पर काम : एमए बेबी (आईएएनएस साक्षात्कार)

नई दिल्ली, 11 फरवरी (आईएएनएस)। दिल्ली में सीपीआई (एम) के महासचिव एमए बेबी ने आगामी विधानसभा चुनावों, विपक्षी राजनीति, कांग्रेस की भूमिका और एसआईआर जैसे मुद्दों पर आईएएनएस के साथ खास बातचीत की। यहां पढ़िए बातचीत के मुख्य अंश।

सवाल : केरल और पश्चिम बंगाल चुनावों के लिए पार्टी किस तरह तैयारी कर रही है?

जवाब : हम सिर्फ केरल और पश्चिम बंगाल ही नहीं, बल्कि तमिलनाडु और असम में भी चुनाव की तैयारी कर रहे हैं। ये ऐसे राज्य हैं जहां वामपंथ की मजबूत राजनीतिक उपस्थिति है। तमिलनाडु में हम इंडिया ब्लॉक के हिस्से के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं, जहां डीएमके के नेतृत्व में वाम और गैर-वाम दल साथ हैं। लेकिन, केरल और पश्चिम बंगाल की स्थिति अलग है। केरल में एलडीएफ लगातार दो बार सत्ता में आई है और हमें उम्मीद है कि तीसरी बार भी जनता हमारा समर्थन करेगी। मुख्यमंत्री पी. विजयन के नेतृत्व में सरकार ने सामाजिक सौहार्द बनाए रखा है, राज्य में कोई सांप्रदायिक दंगा नहीं हुआ। बुनियादी ढांचे, सामाजिक कल्याण, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। हमें भरोसा है, लेकिन हम सतर्क भी हैं क्योंकि अति-आत्मविश्वास खतरनाक हो सकता है।

सवाल : पश्चिम बंगाल में सीपीआई (एम) अकेले चुनाव लड़ेगी या कांग्रेस से गठबंधन की संभावना है?

जवाब : पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिति अलग है। वाम मोर्चे के भीतर सीट बंटवारे और रणनीति को लेकर चर्चा जारी है। पिछले चुनावों में वाम मोर्चा और कांग्रेस के बीच कुछ समझदारी बनी थी, लेकिन इस बार जो संकेत मिल रहे हैं, उनसे लगता है कि ऐसी समझ की संभावना बहुत कम है। हमारा मुख्य फोकस जनता तक पहुंचकर यह बताना है कि भाजपा सबसे बड़ा खतरा है। वह सांप्रदायिक प्रचार के जरिए समाज को बांटने की कोशिश कर रही है। साथ ही भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और शासन की विफलताओं के मुद्दे भी सामने आ रहे हैं। हालांकि, हम तृणमूल कांग्रेस को भाजपा के बराबर नहीं मानते। देश के लिए सबसे बड़ा खतरा आरएसएस-नियंत्रित भाजपा है। वाम मोर्चा बंगाल में अपना जनाधार बढ़ाने और विधानसभा में फिर से मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश करेगा।

सवाल : क्या केरल में कांग्रेस अब भी धर्मनिरपेक्ष पार्टी है या वह मुस्लिम लीग जैसे दलों के साथ खड़ी हो गई है?

जवाब : केरल में कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति खुद उसके लिए भी अच्छी नहीं है। उन्होंने कई अल्पसंख्यक सांप्रदायिक संगठनों के साथ गठजोड़ किया है, जिनमें जमात-ए-इस्लामी से जुड़े समूह और वेलफेयर पार्टी जैसे संगठन शामिल हैं। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग को पूरी तरह धर्मनिरपेक्ष पार्टी नहीं कहा जा सकता। हम उसे उग्रवादी नहीं कहते, लेकिन वह धार्मिक पहचान और प्रतीकों पर निर्भर रहती है। हालांकि, यह भी सच है कि उसने कट्टरपंथी ताकतों से दूरी बनाए रखी है। चिंता की बात यह है कि कांग्रेस चुनावी फायदे के लिए अवसरवादी गठबंधन कर रही है। कुछ पंचायतों में कांग्रेस और भाजपा के बीच सत्ता साझेदारी की खबरें भी हैं। यह विरोधाभास कांग्रेस की धर्मनिरपेक्ष छवि को कमजोर करता है। हमें उम्मीद है कि कांग्रेस आलाकमान केरल इकाई को सही दिशा देगा।

सवाल : क्या शशि थरूर को कांग्रेस में किनारे किया जा रहा है? क्या सीपीआई (एम) के दरवाजे उनके लिए खुले हैं?

जवाब : कुछ समय पहले खबरें थीं कि शशि थरूर कांग्रेस नेतृत्व से दूरी बना रहे हैं। वे कुछ महत्वपूर्ण बैठकों में शामिल नहीं हुए थे, जिससे अटकलें बढ़ीं। बाद में जानकारी मिली कि उन्होंने पार्टी अध्यक्ष और राहुल गांधी समेत वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। केरल कांग्रेस नेतृत्व ने भी घोषणा की है कि शशि थरूर विधानसभा चुनाव में सक्रिय प्रचार करेंगे। फिलहाल लगता है कि मामला अस्थायी रूप से सुलझ गया है। इससे आगे अटकलें लगाना उचित नहीं होगा। जहां तक सीपीआई (एम) का सवाल है, हम राजनीतिक घटनाक्रम का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन करते हैं, लेकिन फिलहाल ऐसा कोई विचार नहीं है।

सवाल : ममता बनर्जी ने एसआईआर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। क्या आप उनके रुख से सहमत हैं?

जवाब : हम चुनाव आयोग द्वारा एसआईआर को जिस तरीके से लागू किया जा रहा है, उसकी कड़ी आलोचना करते हैं। मैंने स्वयं मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर केरल, पश्चिम बंगाल और असम सहित कई राज्यों से मिली शिकायतों का उल्लेख किया है। मतदाता सूचियों से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जा रहे हैं, जो स्वीकार्य नहीं है। मुद्दे के मूल पर हम ममता बनर्जी की आलोचना से सहमत हैं। हालांकि, वह इसे जिस तरह से राजनीतिक आंदोलन का रूप देती हैं, वह उनकी शैली है। हम इस मुद्दे को अपने तरीके से उठाते हैं। लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं कि चुनाव आयोग का तरीका गंभीर रूप से त्रुटिपूर्ण है।

सवाल : राहुल गांधी ने एक अप्रकाशित किताब के आधार पर आरोप लगाए हैं। आपका क्या कहना है?

जवाब : इसमें कोई संदेह नहीं कि उस किताब के प्रकाशन अधिकार पेंगुइन रैंडम हाउस के पास हैं और उन्होंने स्पष्ट किया है कि किताब आधिकारिक रूप से प्रकाशित नहीं हुई है। अनधिकृत प्रसार कॉपीराइट कानून का उल्लंघन होगा। राहुल गांधी ने संसद में उसकी एक प्रति दिखाई, जिससे तकनीकी और प्रक्रियागत विवाद पैदा हुआ। संसदीय नियमों के अनुसार चर्चा में इस्तेमाल दस्तावेजों की प्रामाणिकता जरूरी है। विपक्ष का तर्क है कि लेखक को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करना चाहिए कि सामग्री प्रामाणिक है या नहीं। सरकार अपनी स्थिति स्पष्ट कर सकती है और लेखक भी अपना रुख बता सकता है। यह मामला संसदीय मर्यादाओं के भीतर सुलझाया जाना चाहिए।

सवाल : एझावा नेता वेल्लापल्ली नटेसन ने कहा कि अगर केरल में कांग्रेस-नेतृत्व वाला यूडीएफ जीता तो मुस्लिम लीग का शासन होगा। क्या आप सहमत हैं?

जवाब : हम ऐसे बयानों पर भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं देते, बल्कि वस्तुनिष्ठ राजनीतिक विश्लेषण करते हैं। वास्तविकता यह है कि केरल में कांग्रेस धीरे-धीरे सांप्रदायिक और पहचान-आधारित ताकतों पर निर्भर होती जा रही है। आलोचना को 'मुस्लिम विरोधी' कहकर खारिज करना समाधान नहीं है। हमारी चिंता धर्म नहीं, बल्कि सांप्रदायिक राजनीति है, चाहे वह बहुसंख्यक की हो या अल्पसंख्यक की।

--आईएएनएस

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