नई दिल्ली, 22 जनवरी (आईएएनएस)। आज की तेजतर्रार जिंदगी में अक्सर लोग थकान, तनाव और भूलने की आदत को आम परेशानी मान लेते हैं। लेकिन, कभी‑कभी यह केवल मानसिक थकान नहीं होती, बल्कि यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है। कई डॉक्टर मानते हैं कि बार‑बार ध्यान भटकना, नाम भूलना या दिमाग का भारी लगना सिर्फ दिमाग की कमजोरी नहीं, बल्कि दिल की बीमारी का शुरुआती संकेत भी हो सकता है।
हार्ट डिजीज हमेशा सीने में दर्द या सांस फूलने के जरिए ही सामने नहीं आती। कई बार यह धीरे‑धीरे दिमाग के लक्षणों के जरिए सामने आती है।
ब्रेन फॉग दिमाग की उस हालत को कहते हैं जब आपको चीजें याद नहीं रहतीं, सोचने में दिक्कत होती है, और आप खुद को थोड़ा सुस्त महसूस करते हैं। अक्सर लोग इसे उम्र बढ़ने या तनाव का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं।
दिमाग और दिल के बीच गहरा संबंध है। जब दिल सही से काम करता है, तो दिमाग भी सही ढंग से काम करता है और जब दिल कमजोर होता है, तो दिमाग भी थक जाता है। यही वजह है कि ब्रेन फॉग सिर्फ दिमाग की समस्या नहीं, बल्कि दिल की बीमारी का शुरुआती संकेत भी हो सकता है। इसे पहचानना, जांच कराना और समय पर इलाज शुरू करना बेहद जरूरी है।
डॉक्टर बताते हैं कि यह केवल सतही कमजोरी नहीं होती, बल्कि कई मामलों में दिमाग तक पहुंचने वाले ब्लड सर्कुलेशन में कमी का कारण होती है। जब दिल ठीक से ब्लड पंप नहीं करता, तो दिमाग को पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषण नहीं मिल पाता, जिससे मेमोरी, फोकस, और सोचने‑समझने की क्षमता प्रभावित होती है।
जनरल ऑफ सेरेब्रल ब्लड फ्लो एंड मेटाबॉलिज्म में 2024 में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, दिल की हल्की कमजोरी भी दिमाग तक ब्लड फ्लो घटा सकती है। इसका असर सीधे याददाश्त, ध्यान और सोचने-समझने की क्षमता पर पड़ता है। अगर आप अक्सर भूलते हैं, ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते या सोचने में सुस्ती महसूस करते हैं, तो यह सिर्फ दिमाग की समस्या नहीं, बल्कि दिल की चेतावनी भी हो सकती है।
ऐसे में अपने दिल की जांच कराएं। छोटे‑छोटे बदलाव जैसे ब्लड प्रेशर, हार्ट रेट या ब्लड फ्लो का निरीक्षण करना आपके लिए बड़े फायदे ला सकता है।
--आईएएनएस
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